किसान डायरी सफल खेती का मूल मंत्र: विविधतापूर्ण खेती

Updated on August 27, 2026

 गडग तालुक के पापानाशी गांव के रहने वाले श्री बासनगौडा रायनगौडा प्रगतिशील किसान हैं। यद्यपि उनकी उम्र 77 वर्ष है। तथापि वे उत्साह से भरपूर, पूरी रूचि के साथ खेती करते हैं और एक स्वस्थ जीवन जी रहे हैं।

स्नातक की पढ़ाई के दौरान उन्होंने धरती मां से जुड़कर खेती को अपना रोजगार बनाने व संतोष तथा सम्मानजनक जीवन जीने का निश्चय किया। उन्होंने अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी तथा एक आदर्श प्रगतिशील किसान बनने की दिशा में अपने पिता के साथ खेती करनी प्रारम्भ कर दी। 21 वर्ष की उम्र से ही वे खेती, बागवानी व वानिकी के कार्यों को निरन्तर कर रहे हैं। 55 वर्षों से खेती से जुड़े होने के कारण, उन्हें फसल प्रबन्धन का सघन ज्ञान हो गया है। उनके छोटे बेटे प्रवीणगौड़ा पाटिल बागवानी वाली फसलों के प्रबन्धन में उनकी मदद करते हैं।

40 एकड़ जमीन के मालिक बासनगौड़ा, अपने खेत में 80 प्रकार की खेती, बागवानी व वानिकी सम्बन्धी फसलें उगाते हैं। वे अपने खेत में गन्ना, गेंहूं, ज्वार, चना, मेथी, मूंगफली व लोबिया जैसी मौसमी फसलें उगाते हैं।

वैज्ञानिकों से बात-चीत के बाद, वे दलहन सहित कई प्रकार की फसलें उगाने हेतु उत्साहित हैं। उनके खेत में गुलाब, चमेली, एस्टर जैसे फूलों की फसलें हैं। साथ ही वे आधे-आधे एकड़ में चुकन्दर, पत्तागोभी, हल्दी, बैगन व टमाटर जैसी सब्ज़ियांे की खेती भी करते हैं।
तीन वर्ष पहले, एक नये अनुभव के तौर पर उन्होंने बनावासी से सुपारी के 400 पौधों को खरीदकर एक एकड़ खेत में रोपण किया। इसकी फसल अच्छी हो रही है। उन्होंने अपने दो एकड़ खेत में गुलदाउदी, एक एकड़ में केला व आधे एकड़ में करी पत्ता की खेती की है। इसके साथ ही उनके खेत में इमली, नारियल, शरीफा, राम फल, सिंघाड़ा, अमरूद व नीबू के पेड़ भी हैं। इन्होंने अपने बगीचे में जेट््रोफा, नीम, बांस, करंज, सागौन, चन्दन जैसे जंगली पौधे लगा रखे हैं। साथ ही घृतकुमारी ;एलोवेराद्ध, जापानी पुदीना, तुलसी, गिलोय व कटहल जैसे औषधीय पौधे भी इनकी खेती का हिस्सा हैं। गौड़ा इन औषधीय पौधों से बनी घरेलू दवाओं को पड़ोसियों को निःशुल्क उपलब्ध कराते हैं।

ये अपने खेत के कामों के लिए ट््रैक्टर, सीड ड््िरल, हल, रोटावेटर, हैरो, स्पेशल हैरो, रेन गन, स्प्रिंकलर सिंचाई इकाई और बूंद सिंचाई इकाई जैसे उपकरणों का उपयोग करते हैं। इनके बगीचे में एक खुला कुंआ है, जिसमें बारिश के मौसम में बिना पानी बरबाद किये वैज्ञानिक तरीके से पानी भरा जाता है। इससे भूजल पुनर्भरण होता रहता है और खेत में लगे ट्यूबवेल का जल स्तर अच्छा बना रहता है। मिट्टी व पानी के संरक्षण के लिए, उन्होंने खेत की मेडबन्दी जैसी तकनीक अपनाई है और मेड़ों पर चारे वाली घास भी लगाई है। आठ वर्ष पहले, उन्होंने कृषि विभाग की ‘‘कृषि भाग्य योजना’’ की सहायता से लक्कुंडी स्थित अपने बगीचे में 21 मीटर चैड़ा खेत तालाब बनवाया था।

वे न केवल स्वयं विविध व आदर्श खेती करते हैं, वरन् दूसरों को आत्मनिर्भर व प्रगतिशील बनने की दिशा में सिखाने व प्रेरित करने का कार्य भी पूरी रूचि व उत्साह से करते हैं। इस प्रकार, वे खेती में सफल होने की मंशा रखने वाले सभी लोगों के लिए वास्तव में एक रोल माॅडल हैं।

गौड़ा की उपलब्धियों को देखते हुए, कृषि विभाग द्वारा उन्हें वर्ष 2023-24 के लिए ‘‘जिला स्तरीय सर्वश्रेष्ठ किसान पुरस्कार’’ से सम्मानित किया गया है।
उन्होंने चीन, दिल्ली, महाराष्ट््र, हरियाणा, राजस्थान, केरल, तमिलनाडु सहित देश-विदेश के विभिन्न स्थानों का भ्रमण किया। भ्रमण के दौरान वहां के स्थानीय किसानों के साथ बात-चीत करते हुए, वे अपने खेत पर भिन्न-भिन्न प्रकार की तकनीकों को अपनाने में सक्षम हुए। भ्रमण तथा कृषि विभाग के साथ निरन्तर सम्पर्क में रहते हुए, वे अपने एक ही खेत में लगभग 80 प्रकार के पौधों व वृक्षों को उगा रहे हैं।

कुल मिलाकर, बासनगौड़ा हमेशा कुछ नया करने की दिशा में उत्सुक रहते हैं। उनका मानना है कि खेती ने उन्हें आत्मनिर्भर बनाया है और आर्थिक रूप से मजबूती व संतुष्टि प्रदान की है। वे कहते हैं, खेती को सफल व स्थाई बनाने के लिए युवा किसानों को आगे आना चाहिए और एकीकृत खेती को अपनाने में संकोच नहीं करना चाहिए। विविधतापूर्ण खेती से होने वाले आर्थिक लाभ के बारे में चर्चा करते हुए बासनागौड़़ ने बताया कि खेती व परिवार के सभी खर्चों को घटाने के बाद, उन्हें अनुमानित रूप से चार से छह लाख रू0 की शुद्ध आय होती है। खेत पर बना उनका घर उन सभी युवा किसानों का स्वागत करता है, जो उनसे कुछ नया सीखने की चाह रखते हैं।

मोबाइल नं0 9845876143 के माध्यम से बासनगौड़ा से सम्पर्क किया जा सकता है।

बासनगौड़ा की खेती से सम्बन्धित उपरोक्त जानकारी गडग की एक पत्रकार सुश्री हेमा मोराबा द्वारा संकलित की गयी है। अधिक जानकारी हेतु सुश्री हेमा से मोबाइल नं0 9844615364 पर सम्पर्क किया जा सकता है।


Source: Sustainable vegetable farming, LEISA INDIA, Vol. 27, No.3,September 2025