छोटे-मझोले किसानों के लिए स्थाई मशीनीकरण का अर्थ केवल मशीनों का निर्माण करना नहीं है। इसका अर्थ स्थानीय क्षमता, उद्यमशीलता व विश्वास का निर्माण करना है। नवाचार इकाई या इनोवेशन गिल्ड का पारिस्थितिकी तंत्र माॅडल दर्शाता है कि सही सहभागिता के साथ तकनीकें वास्तव में ग्रामीण भारत में अपनी जड़ें जमा सकती हैं।
भारत में, 90 प्रतिशत से अधिक किसान कृषि को अपनी आय का मुख्य स्रोत मानते हैं और 70 प्रतिशत किसान छोटे व सीमान्त भूमि जोत के स्वामी हैं। लम्बा-चैड़ा घरेलू बाजार होने के बावजूद, मौजूदा मशीनें छोटे व सीमान्त किसानांे की विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करने में असमर्थ हैं। कई नवाचारों के बावजूद, ये मशीनें इण्टरनेट वीडियो व प्रायोगिक परियोजनाओं तक ही सीमित हैं। सीमित उत्पादन व वितरण चैनलों के कारण, किसानों के लिए इन मशीनों व उपकरणों तक पहुंचना व उनका उत्पादन करना रसद व वित्तीय दृष्टि से कठिन हो जाता है।
तकनीकंे न अपनाये जाने के पीछे जिम्मेदार कुछ कारक निम्नवत् हैं:-
ऽ उभर रहे उपकरणांे एवं विचारों के बारे में सीमित जागरूकता, जिससे उनकी विशिष्ट फसलों या परिस्थितियों को लाभ हो सकता है।
ऽ डिजाइन की जा रही अधिकांश मशीनें ‘‘मानक उत्पादों’’ के रूप में उपलब्ध हैं, जबकि प्रत्येक गांव व खेत की मिट्टी, फसलें, भू-भाग व कृषि पद्धतियां भिन्न-भिन्न होती हैं।
ऽ मानक संचालन प्रक्रियाओं ;एसओपीद्ध का अभाव व रख-रखाव सेवाओं में विश्वसनीयता की कमी।
ऽ मशीनें खराब हो जाने की स्थिति में समय पर उनके मरम्मत व रख-रखाव के लिए प्रशिक्षित तकनीशियनों व बुनियादी ढांचों का अभाव।
ऽ अपरिचित मशीनों में निवेश करने पर किसानों का कम भरोसा।
नवाचारांे व छोटी जोत वाले किसानों के बीच की दूरी को कम करने तथा नयी तकनीकों को कृषि समुदायों द्वारा अपनाये जाने को प्रोत्साहित करने हेतु, नवाचार इकाई/इनोवेशन गिल्ड ने ग्राम स्तर पर मौजूद कुशल उद्यमियों का एक व्यापक स्थानीय नेटवर्क विकसित किया है। ग्राम स्तरीय उद्यमी ग्रामीण नवाचार श्रृंखला की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। ये ग्राम स्तरीय उद्यमी स्थानीय कृषि परिस्थितियों की वास्तविकताओं को समझते हैं और इसलिए ये तकनीकों के उपयोग हेतु कृषि समुदायों का मार्गदर्शन कर सकते हैं। सही कौशल, उपकरण व सहभागिता से सम्पन्न ग्रामीण शिक्षा संस्थानों का एक समूह तैयार करके गांवों में विश्वसनीय व सहायक मानव संसाधनों का एक ‘‘पर्याप्त आधार’’ बनाया जा सकता है।
नवाचार इकाई/इनोवेशन गिल्न्ड का पारिस्थितिकी तंत्र व्यवस्थित दृष्टिकोण:
नवाचार इकाई/इनोवेशन गिल्ड ने क्रियान्वयन हेतु चरणबद्ध दृष्टिकोण विकसित किया, जिससे सकारात्मक परिणाम प्राप्त हुए हैं –
1. सामुदायिक सहभागिता व ग्रामस्तरीय उद्यमियों ;टपससंहम समअमस म्दजमतचतपेमतेद्ध की पहचान: नये विचारों को ग्रामीण समुदायों से जोड़ने के लिए, समुदाय को ही सबसे पहला बिन्दु माना जाता है। इसके लिये दो प्रकार की सहभागिता की आवश्यकता है। अद्ध इनोवेशन गिल्ड जमीन स्तर पर सघन रूप से काम करने वाले संगठनों के साथ साझेदारी करता है। ये संगठन, स्वयं सहायता समूह, किसान उत्पादक संगठन या उनकी शाखाएं भी हो सकती हैं, जो स्थानीय आजीविका के विषय पर गहरी समझ रखते हैं, क्षेत्रीय तकनीकी कमियों के बारे में जानकारी देते हैं तथा संभावित ग्रामस्तरीय उद्यमियों की पहचान करते हैं। बद्ध स्थानीय मैकेनिक, इलेक्ट््रीशियन, प्लम्बर, आईटीआई स्नातक सहित ये ग्रामस्तरीय उद्यमी स्थानीय संसाधन हैं, जो तकनीकी रूप से सक्षम होते हैं और स्थानीय उद्यम स्थापित करने में रूचि रखते हैं।
2. तकनीकी कमियों की पहचान: आपसी विश्वास को बनाने हेतु जमीनी स्तर पर काम करने वाले सहभागी संगठनों व उनके द्वारा चिन्हित किसान समूहों के साथ बैठकें आयोजित की जाती हैं। इसे प्रत्यक्ष बैठकों एवं प्रक्षेत्र भ्रमणों के माध्यम से पूरा किया जाता है। तत्पश्चात् तकनीकी कमियों को पहचानने सम्बन्धी अभ्यास किये जाते हैं। इस प्रक्रिया के दौरान, वर्तमान में उपयोग किये जा रहे उपकरणों एवं उनकी डिजाइन, क्षमता, कच्चा माल एवं उर्जा स्रोत की अनुकूलता आदि में क्या कमियां हैं, इसकी पहचान की जाती है।
3. तकनीकी मानचित्रण: एक बार स्थानीय आवश्यकताओं के उपर स्पष्टता बन जाने के बाद, तकनीकी बैठकों के दौरान आवश्यकताओं का मानचित्रण किया जाता है। नवाचार अपनाने हेतु इच्छुक किसानों की पहचान की जाती है। सबसे पहले, नवाचारों की खोज की जाती है व स्थानीय अनुकूलता का आकलन किया जाता है। यदि आवश्यक हो तो टेस्टेड व जमीनी स्तर से जुड़े समाधानों के लिए व्यापक बाजार की जांच की जाती है। नवाचारों व किसानांे के बीच की खाई को पाटने हेतु वर्चुअल प्रदर्शन दिवस आयोजित किये जाते हैं, जिसके माध्यम से वर्चुअल लर्निंग एन्वायरन्मेण्टल लीडर नये उपकरणों को संचालित होते हुए देखते हैं।
4. लघु एवं मध्यम ग्रामस्तरीय उद्यमियों के ;वीएलईद्ध के व्यवसायिक माॅडलों का निर्माण: ग्रामस्तरीय उद्यमियों को जमीनी स्तर पर सहायक माना जाता है। अपनी रूचि व कौशल के आधार पर ये ग्रामस्तरीय उद्यमी यह तय करते हैं कि वे चयनित मशीन से कैसे आय अर्जित करना चाहते हैं – कद्ध नई, टेस्टेड तकनीकों की बिक्री व वितरण के लिए स्थानीय विशेषज्ञ बनना। खद्ध गांवों में मशीनों के लिए विश्वसनीय, स्थानीय सेवा प्रदान करना। गद्ध विशेष मशीनों का स्वामित्व व किराये पर देकर छोटे किसानों को अनुकूलित किराया सेवा प्रदान करना। घद्ध विशिष्ट ग्राम आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए स्थानीय स्तर पर छोटे, अनुकूलित कृषि उपकरणों का संयोजन या निर्माण करना। इसके बाद उन्हें उनकी रूचि के क्षेत्रों में व्यवसायिक माॅडल तैयार करने में मार्गदर्शन दिया जाता है।
5. ग्राम स्तरीय उद्यमियों को समर्थन: अन्य उद्यमियों की तरह, ग्राम स्तरीय उद्यमियों को भी अपने उद्यम बनाने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की आवश्यकता होती है। ये सहयोग निम्नवत् हैं –
कद्ध क्षमता निर्माण: इनोवेशन गिल्ड व्यापक व आवश्यकता आधारित प्रशिक्षण प्रदान करता है। यह कार्यशाला उपकरण, बुनियादी वेल्डिंग एवं सुरक्षा उपाय जैसे आवश्यक मूलभूत कौशलों से प्रारम्भ होता है, जो अक्सर प्रमाणित आईटीआई प्रशिक्षण संस्थानों के सहयोग से आयोजित किया जाता है। व्यवहारिक तत्परता सुनिश्चित करने के लिए सघन व्यवहारिक कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं। उदाहरण के लिए, अनन्तपुर में दक्षिणी क्षेत्र कृषि मशीनरी प्रशिक्षण व परीक्षण संस्थान ;ैवनजीमतद त्महपवद थ्ंतउ डंबीपदमतल ज्तंपदपदह ंदक ज्मेजपदह प्देजपजनजम ;ैत्थ्डज्-ज्प्द्ध में पावर वीडर, ब्रश कटर व आॅयल इंजन सहित कृषि मशीनरी की संपूर्ण मरम्मत व रख-रखाव पर केन्द्रित 5 दिवसीय विशेष प्रशिक्षण आयोजित किया गया था।
खद्ध नवाचारियों तक पहुंच: भारी मशीनरी में निवेश करने वाले लघु एवं मध्यम उद्यमों को यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि यह उनके क्षेत्र के अनुकूल हो। इनोवेशन गिल्ड, स्थानीय सहभागियों के माध्यम से, मशीनों की उपयुक्तता या अनुपयुक्तता के उपर जमीनी स्तर से प्राप्त प्रतिक्रियाओं को नवाचारियों तक पहुंचाता है, ताकि आवश्यक बदलाव किये जा सकें। जैसे-जैसे ग्राम स्तरीय उद्यमी अपने व्यवसाय में प्रगति करते हैं, इनोवेशन गिल्ड यह सुनिश्चित करता है कि ग्रामस्तरीय उद्यमियों की नवाचारियों तक सीधी पहुंच हो ताकि वे उनके अनुसार इन्वेण्ट््री बनाने या नये उत्पादों के साथ व्यवसाय शुरू करने तत्पर हों।
गद्ध व्यवसाय के लिए आवश्यक उपकरण व प्लेटफार्म तक पहुंच: प्रत्येक ग्रामस्तरीय उद्यम एक व्यवसाय योजना तैयार करता है। उनकी प्रगति पर नजर रखने के लिए, इनोवेशन गिल्ड लागत अर्थशास्त्र कैलकुलेटर के रूप में एक सरल उपकरण प्रदान करता है, जो ग्रामस्तरीय उद्यमियों को दैनिक लागत का अनुमान लगाने, उचित सेवा मूल्य निर्धारित करने व उनके द्वारा संचालित प्रत्येक मशीन के लिए बे्रक-ईवन प्वाइण्ट की पहचान करने में मदद करता है।
घद्ध वित्तपोषण संस्थानों तक पहुंच: उच्च श्रेणी की मशीनरी के लिए अधिक निवेश की आवश्यकता होती है। निर्णय लेने में सुविधा के लिए उपलब्ध विकल्पों – जैसे अनुदान या कम ब्याज दरों पर एफपीसी से वित्तपोषण का अध्ययन किया जाता है। फिर, वित्तीय संस्थानों के साथ साझेदारी की जाती है ताकि ग्रामस्तरीय उद्यमियों की बिना किसी अतिरिक्त लागत के कई वित्तपोषण विकल्पों तक पहुंच प्राप्त हो सके।
दद्ध वित्तीय संगठनों तक पहुंच: ये सभी, एक साथ मिलकर एक ऐसा चक्र तैयार करते हैं, जहां नवाचार, उद्यम व फीडबैक एक-दूसरे से आपस में जुड़े हुए हैं।
प्रभाव
नवाचार यूनिट के दृष्टिकोण ने सफलतापूर्वक एक सुदृढ़, समुदाय-केन्द्रित पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित किया है, जो ग्रामीण क्षेत्रों को अनुकूलित नवाचार से सीधे जोड़ता है। आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना, महाराष्ट््र, ओडिशा, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश व हिमाचल प्रदेश में जमीन से जुड़कर काम करने वाले 7 हितभागियों के साथ 250 से अधिक वर्चुअल लर्निंग संस्थानों का एक नेटवर्क स्थापित किया गया है। हमारे पास 40 से अधिक नवाचारियों के समूह से प्राप्त तकनीकों के साथ 81 सक्रिय वर्चुअल लर्निंग संस्थान हैं। इनमें से लगभग 50 वर्चुअल लर्निंग संस्थानों ने नवाचार इकाई द्वारा आयोजित 5 व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रमों में से किसी एक में प्रतिभाग किया है।
नियमित मरम्मत व रख-रखाव, परिचालन सहायता व मशीनरी की अनुकूलित किराये की सेवाओं को सुनिश्चित करके, वर्चुअल लर्निंग संस्थान स्थाई व्यवसाय चलाते हैं, जिससे लोग तेजी से तकनीकों को अपना रहे हैं। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार भी मिलता है। तालिका 1 के माध्यम से कुछ उदाहरण प्रदर्शित किये जा रहे हैं –
तालिका 1: कुछ उदाहरण
| शेख बाजी ;तेलंगानाद्ध – मैनुअल उपकरण बिक्री | इन्होंने निराई व कपास की बुवाई जैसे महिलाओं द्वारा किये जाने वाले श्रमसाध्य कार्यों को संज्ञान में लिया व स्थानीय स्तर पर उपकरण बनाने वाले छोटे स्तर के कारीगरों के साथ सहभागिता कर, इन्होंने ब्लेड वीडर से लेकर सौर कीट जाल तक 23 कम लागत वाले उपकरण बेचे। इससे इनको रू0 4,440 की आय हुई। साथ ही कुशल मृदा सम्बन्धी कृषि पद्धतियों को बढ़ावा मिला। |
| कुडा वेंकटेश ;आंध्र प्रदेशद्ध | ग्रामीण मरम्मत सेवाए ंः इन्होंने तेल इंजन, प्रसंस्करण मशीनें व बिजली से चलने वाले खर-पतवारनाशक मशीनों की मरम्मत के लिए एक स्थानीय कृषि मशीनरी मरम्मत इकाई स्थापित की। एक ही सीजन में इन्होंने रू0 26,600.00 की आय अर्जित की। इससे एक तरफ तो किसानों के कार्य समय पर हुए, दूसरी तरफ एक विश्वसनीय स्थानीय सेवा प्रणाली का निर्माण हुआ। |
| मां कमला एफपीसी ;ओडिशाद्ध | इमली प्रसंस्करण का मशीनीकरण: इमली के बीज निकालने वाली मशीन की शुरूआत की, जिससे उत्पादन 100 किग्रा0 से बढ़कर 360 किग्रा0 प्रतिदिन हो गया और श्रम लागत में 84 प्रतिशत की कमी आयी। साथ ही महिला स्वयं सहायता समूहों को इकाई का प्रबन्धन व किराये पर देने का अधिकार मिला। |
| पेराइया ;तिरूपति, आंध्र प्रदेशद्ध | बेड बनाने की मशीन किराये पर देना: 10 गांवों में 35 एकड़ भूमि पर टमाटर की खेती के लिए अनुकूलित किराये की सेवाएं प्रदान कीं व एक ही मौसम में रू0 38,700.00 की कमाई की। |
| शीला दीदी ;मध्य प्रदेशद्ध | सिंगल व्हील वीडर: खर-पतवार हटाने का समय प्रति एकड़ पांच दिनों से घटकर 8-10 घण्टे हो गया है, जिससे एक महीने में 30 एकड़ भूमि कवर हो गयी और महिलाओं की मेहनत भी कम हुई। |
| अदरक हार्वेस्टर का सहभागी संशोधन ;अरकू, आंध्र प्रदेशद्ध | किसानों व स्वयंसेवी उद्यम समूहों ने मिलकर बैल से चलने वाले अदरक हार्वेस्टर को नया रूप दिया, जिससे एक बेकार प्रोटोटाइप को स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल व श्रम बचाने वाले उपकरण में बदल दिया गया। |
| मिर्च थे्रशर उद्यम ;अराकू व पाडेरूद्ध | मिर्च थे्रशर उद्यमियों ने यांत्रिक थे्रशर प्रस्तुत किया, जिससे प्रसंस्करण लागत में 97.5 प्रतिशत की कमी आयी, दक्षता में सुधार हुआ व स्थानीय स्तर पर मरम्मत व रख-रखाव सहायता भी सुनिश्चित हुई। और भी बहुत कुछ |
भावी योजना: सहयोग के माध्यम से स्थाई विकास: प्रौद्योगिकी को तेजी से अपनाने के लिए आवश्यक चुनौतियांे व संसाधनों को देखते हुए, हमारा मानना है कि सहयोग ही आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता है। नवाचार यूनिट ;प्ददवअंजपवद ळनपसकद्ध भारत भर के स्वैच्छिक संगठनों व नवाचारियों के साथ मिलकर प्रौद्योगिकी समाधान तैयार करने के लिए सहयोग चाहता है। हम नवाचारियों व वर्चुअल लर्निंग प्लेटफार्म के लिए पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने हेतु हितभागियों के साथ सहयोग करने के लिए तत्पर हैं।
सन्दर्भ: कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, कृषि जनगणना 2015-16: परिचालन जोतों की संख्या एवं क्षेत्रफल पर अखिल भारतीय रिपोर्ट ;चरण-1द्धए 2019, कृषि, सहयोग एवं किसान कल्याण विभाग, भारत सरकार। वेबसाइट: https://agcensus.nic.in/
एस साई मोहन
परियोजना समन्वयक ;नवाचार इकाईद्ध
वाटरशेड सपोर्ट सर्विसेज एण्ड एक्टिविटीज नेटवर्क
प्लाट नं0 685 एवं 686,
गली नं0 12, लक्ष्मी नरसिम्हा काॅलोनी
मल्लिकार्जुन पहाड़ी, नागोले,
हैदराबाद – 500068 ;तेलंगानाद्ध
Email: saimohan@wassan.org
Source: Sustainable farm mechanisation, LEISA INDIA, Vol. 27, No.4, December 2025



