मटका महोत्सव के माध्यम से जैविक खेती की ओर एक सार्थक पहल

Updated on October 13, 2025

जैविक खेती को सामूूहिक रूप से बढ़ावा देने व समुदाय की स्वेच्छा से भागीदारी सुनिश्चित करने हेतु आयोजित किया गया मटका महोत्सव न केवल खेती की लागत को कम करता है, वरन् स्वास्थ्य एवं पर्यावरण की सुरक्षा करता है साथ ही किसानों को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में सशक्त भी करता है।


पूर्वी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जनपद का कैम्पियरगंज विकास खण्ड सर्वाधिक बाढ़ प्रभावित व जल- जमावग्रस्त क्षेत्रों में से एक है। लगभग प्रत्येक वर्ष आने वाली बाढ़ व लम्बे समय तक बने रहने वाले जल-जमाव से लघु, सीमान्त व महिला किसान बहुल इस क्षेत्र की कृषिगत उत्पादकता व कृषि पर आधारित ग्रामीण आजीविका बुरी तरह से प्रभावित होती है। लोग अपने नुकसानों को कम करने के लिए मुख्य फसलों के स्थान पर सब्ज़ियों की खेती को प्राथमिकता देने लगे और बदलते जलवायु की परिस्थितियों में सब्ज़ियों को खेती पर कीटों व रोगों का आक्रमण अधिक होता है, जिससे यहां के किसान खेती में रसायनों का प्रयोग जमकर करते हैं। इससे एक तरफ तो इनकी खेती की लागत बढ़ती है, तो दूसरी तरफ मृदा, मानव व पर्यावरण स्वास्थ्य भी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है, साथ ही कृषिगत निवेशों हेतु किसानों की निर्भरता बाजारों पर भी बढ़ने लगी।

इन्हीं परिस्थितियों में कम लागत, स्थाई एवं पर्यावरण-सम्मत कृषिगत अभ्यासों की आवश्यकता को महसूस किया गया और इसी बात को ध्यान में रखते हुए गोरखपुर एन्वायरन्मेण्टल एक्शन ग्रुप ने जैविक खेती को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने हेतु जैव उर्वरकों एवं जैविक कीटनाशकों को समुदाय के बीच प्रचारित व प्रसारित करना प्रारम्भ किया। इस कड़ी में अन्य जैव उर्वरकों के साथ-साथ मटका खाद तैयार कर उसका उपयोग करने के उपर समुदाय को संवेदित, जागरूक व उत्प्रेरित करने का कार्य किया गया। चूंकि मटका खाद सबसे सरल तकनीक व स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों से तैयार होता है। अतः इसे बड़े पैमाने पर बनाने हेतु प्रोत्साहित करने तथा समुदाय की सामूहिक व सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने की दृष्टि से मटका खाद बनाने को एक महोत्सव के तौर पर लांच करने की बात सोची गयी। इसी क्रम में गोरखपुर जनपद के कैम्पियरगंज विकास खण्ड के 15 गांवों में मटका महोत्सव मनाया गया। जिसके तहत् प्रत्येक गांव में एक निश्चित दिन किसानों को एकत्रित कर पहले सत्र में जैव उर्वरकों एवं मटका खाद से होने वाले लाभों के बारे में जागरूक करते हुए उसे बनाने की विधि बताई गयी और दूसरे सत्र में सामूहिक रूप से मटका खाद बनवाया गया।


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