नवीकरणीय ऊर्जा अर्थात् सोलर से चलने वाले कोल्ड स्टोरेज बनाने से कर्नाटक के सादली गाँव के औद्यानिक खेती करने वाले छोटे किसानों की आजीविका में सुधार के अलावा और भी बहुत से लाभ हुए हैं। महिलाओं व युवाओं की सक्रिय भागीदारी वाली यह पहल अपव्यय को कम करने, खाद्य सुरक्षा बढ़ाने व सतत् विकास लक्ष्यों में योगदान देने के लिए एक आदर्श उदाहरण के रूप में कार्य करती है।
भारत में कृषि सेक्टर बहुत बड़ा व महत्वपूर्ण सेक्टर है, जो लगभग 60 प्रतिशत लोगों का भरण-पोषण करता है। यह बिडम्बना ही है कि देश के कृषि उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले लघु व सीमान्त किसानों को खेती, विशेषकर फल, सब्ज़ियां एवं फूल जैसी जल्दी खराब होने वाली फसलों के उत्पादकों के रूप में बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इन चुनौतियों में अपर्याप्त भण्डारण सुविधाएं, अविश्वसनीय विद्युत आपूर्ति व कटाई के बाद होने वाले बडे़ नुकसान शामिल हैं। इनके परिणामस्वरूप, उपज की बरबादी, आय के अवसरों में कमी व ग्रामीण समुदायों के आर्थिक विकास में बाधा उत्पन्न होती है। दूसरी ओर, कृषि पद्धतियों में सौर तकनीकों का उपयोग तेजी से होने लगा है। इनसे न केवल किसान समुदायों का रिजीलियेन्स बढ़ रहा है, वरन् पर्यावरण के अनुकूल पद्धतियों को अपनाने से जलवायु परिवर्तन के व्यापक प्रभावांे को कम करने की दिशा में भी योगदान हो रहा है। जल्दी खराब होने वाली फसलों की खेती करने वाले किसानों की समस्याओं का समाधान करने की दृृष्टि से ऊर्जा व संसाधन संस्थान (टेरी) ने वर्ष 2023-24 में इस तकनीक का उपयोग करते हुए, कर्नाटक के चिक्कबल्लापुरा जिले के सादली गाँव में एक नवीन सौर ऊर्जा चालित कोल्ड रूम परियोजना क्रियान्वित किया। ईको-इनर्जी के वित्तीय सहयोग से संचालित इस महिला केन्द्रित परियोजना का उद्देश्य लघु व सीमान्त किसानों के जीवन में सुधार लाना है और इसके अन्तर्गत 5 ग्राम पंचायतों के 34 गाँवों में 5617 किसानों के साथ कार्य किया जायेगा।
एक पहल
कुल 800 किसानों वाले परियोजना आच्छादित गाँव सादली में लगभग 35 प्रतिशत किसान लघु एवं सीमान्त किसानांे की श्रेणी में आते हैं, जिनके पास 2 हेक्टेयर से कम कृषि भूमि है। इस क्षेत्र की मुख्य औद्यानिक फसलों में आम, अंगूर, अनाज, चीकू, अमरूद, पपीता, केला, खट्टे फल व कटे हुए फूल हैं। कटाई के बाद भण्डारण सम्बन्धी बुनियादी ढाँचों जैसे- गोदाम, कोल्ड स्टोरेज की श्रृँखला, छँटाई एवं पैकिंग घर और अनियमित विद्युत आपूर्ति के कारण किसान अपने औद्यानिक उत्पादों को कृषिगत उत्पाद बाजार समिति यार्ड या निजी व्यापारियों के हाथों तुरन्त बेचने पर मजबूर होत हैं। परिणामतः उपज के बहुत कम मूल्य मिलते हैं। ग्रिड से जु़ड़ी सबसे निकटतम पारम्परिक कोल्ड स्टोरेज सुविधाएं गाँव से लगभग 30 किमी0 दूर हैं, जहाँ पाँच दिन की अवधि के लिए भण्डारण शुल्क रू0 2.00 प्रति किग्रा0 की दर से लिया जाता है, जो बहुत अधिक है। इस प्रकार लघु व सीमान्त किसान इस कोल्ड स्टोरेज की सुविधा का लाभ नहीं ले पाते हैं।
सादली गाँव में एक दशक पहले स्थापित सादलीम्मा औद्यानिक किसान उत्पादक कम्पनी लिमिटेड एक स्थानीय किसान उत्पादक संगठन (फार्मर प्रोड्यूसर आर्गनाइजेशन-एफपीओ) है। यह एफपीओ मुख्य रूप से किसानों को कृषिगत निवेश जैसे- बीज, कीटनाशक एवं उर्वरकों की आपूर्ति थोक दरों पर करता रहा है। एफपीओ के साथ होने वाली प्रत्येक बैठक या सम्पर्क में किसान, विशेषकर महिला किसानों की तरफ से यह बात निकल कर आ रही थी कि कम मांग के कारण जल्दी खराब होने वाले उत्पादों से बहुत सी चुनौतियां उत्पन्न हो जा रही हैं। साथ ही उनकी तरफ से व्यवहारिक समाधान करने का अनुरोध भी किया जा रहा था। इस निरन्तर बनी रहने वाली समस्या से निपटने के लिए एफपीओ ने अपने तकनीकी नवाचारों का उपयोग करके एक स्थाई समाधान प्रदान करने में सहयोग करने हेतु टेरी से सम्पर्क स्थापित किया।
प्रक्रिया
टेरी ने परियोजना को तीन अलग-अलग चरणों में क्रियान्वित किया- योजना चरण, क्रियान्वयन चरण व परियोजना से बाहर आने का चरण। एक एकीकृत संस्थागत दृष्टिकोण अपनाया गया, जिसमें परियोजना पूर्ण करने के लिए टेरी ने प्रत्येक चरण में समन्वयक की भूमिका निभाई। इसके अन्तर्गत एक सौर ऊर्जा से चलने वाले कोल्ड स्टोरेज की स्थापना तथा बाद में सादलीम्मा औद्यानिक किसान उत्पादक कम्पनी लिमिटेड को उसका हस्तान्तरण शामिल था। उद्यान विभाग के तहसील स्तर के कार्यालय ने तकनीकी मार्गदर्शन के साथ-साथ प्रशिक्षण व क्षमता निर्माण की सुविधा प्रदान की। सौर ऊर्जा चलित कोल्ड कक्ष की स्थापना व वार्षिक रख-रखाव की जिम्मेदारी उपकरण आपूर्ति करने वाला वेण्डर की थी, जबकि सादलीम्मा औद्यानिक किसान उत्पादक कम्पनी लिमिटेड ने कोल्ड स्टोरेज स्थापित करने हेतु आवश्यक स्थान की उपलब्धता सुनिश्चित की।
प्रारम्भ में, फसल उगाने वाले क्षेत्र, औद्यानिक फसलों के प्रकार, कटाई, सफाई, छंटाई, भण्डारण, सब्ज़ियों, फलों व फूलों की पैकिंग से सम्बन्धित अभ्यासों, विपणन अभ्यासों, स्थानीय स्तर पर मांग एवं आपूर्ति से सम्बन्धित समस्याओं के ऊपर जिले व तहसील स्तर से द्वितीयक आँकड़ों का संग्रह किया गया। इसके अलावा, घरेलू सर्वेक्षणों के माध्यम से एफपीओ के किसान सदस्यों से विस्तृत जानकारी एकत्र की गयी। घरेलू सर्वेक्षण का नमून आकार लगभग 10 प्रतिशत (100 किसान) था। इसके अतिरिक्त, परियोजना गतिविधियों को एकीकृत करने व परियोजना की योजना बनाने, क्रियान्वयन व प्रबन्धन के लिए एक रूपरेखा विकसित करने हेतु महिला किसानों व एफपीओ व उद्यान विभाग, कर्नाटक सरकार के समिति सदस्यों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। जल्दी खराब होने वाले उपजों के भण्डारण के लिए स्थाई समाधान की महत्वपूर्ण मांग के कारण टेरी ने अक्षय ऊर्जा द्वारा संचालित कोल्ड स्टोरेज की स्थापना करके इस मुद्दे को हल करने की बात कही।
पायलट प्रदर्शन इकाई
विभिन्न हितभागियों के साथ चर्चा से प्राप्त परिणामों के आधार पर, टेरी द्वारा स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार परियोजना स्थल पर 5 मीट्रिक टन क्षमता वाला ऑफ-ग्रिड सौर ऊर्जा चालित कोल्ड कक्ष को स्थापित किया गया, जो 5 किलोवॉट सौर फोटोवोल्टिक प्रणाली का उपयोग करके संचालित होती है। इस प्रणाली में बैटरी, डीजल अथवा विद्युत की आवश्यकता नहीं होती है। यह प्रणाली दिन में सूर्य की रोशनी से चार्ज होती है और किसी अन्य पारम्परिक ऊर्जा स्रोतों की सहायता के बिना ही कोल्ड कक्ष को 24 घण्टे ठण्डा बनाये रखती है। तकनीक एवं उपकरण आपूर्ति करने वाले वेण्डर का चयन टेरी द्वारा चुने गये वेण्डरों में से किया गया था। यह वेण्डर निर्धारित समय में अच्छी गुणवत्ता वाली प्रणाली की आपूर्ति करने, बिक्री के बाद बेहतर सेवा व लम्बे समय तक सहयोग प्रदान करने में सक्षम है।
कोल्ड कक्ष स्थापित करने में 14 लाख रूपये की लागत आयी, जो परियोजना से व्यय की गयी। एफपीओ ने कोल्ड स्टोरेज स्थापित करने के लिए न सिर्फ जगह उपलब्ध कराया, वरन् बाद में इसके रख-रखाव का भी ध्यान रखा। एफपीओ द्वारा किसानों को किराये पर सौर ऊर्जा चालित कोल्ड स्टोरेज उपलब्ध कराया जाता है। इसमें महिला किसानों को वरीयता दी जाती है। टेरी ने सौर ऊर्जा चालित कोल्ड स्टोरेज की मरम्मत व रख-रखाव के लिए एक सेवा तंत्र बनाया है, जिसका प्रबन्धन एफपीओ व उत्पाद आपूर्ति करने वाले वेण्डर के यहाँ की प्रशिक्षित महिला सीईओ द्वारा किया जाता है।
महिलाओं के नेतृत्व में प्रबन्धन
इस परियोजना में योजना निर्माण व क्रियान्वयन से लेकर प्रबन्धन तक के प्रत्येक चरण में महिलाओं की भागीदारी पर जोर दिया गया। सौर ऊर्जा चालित कोल्ड स्टोरेज के दैनिक संचालन व रख-रखाव की देख-रेख के लिए महिला नेतृत्व वाली एक समिति का गठन किया गया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि परियोजना जेण्डर की दृष्टि से संवेदनशील भी है व इसमें स्थाईत्व भी है। परियोजना के तहत्, महिला सदस्यों को शामिल करते हुए इको-इनर्जी सौर आधारित कोल्ड स्टोरेज समिति की स्थापना की गयी, ताकि प्रणाली की निगरानी की जा सके और आवश्यकतानुसार सौर कोल्ड स्टोरेज के रख-रखाव व खराब पुजों को बदलने या मरम्मत करने के लिए एफपीओ निधियों का उपयोग करने हेतु सहायता व अनुमोदन प्रदान किया जा सके।
प्रणाली की देख-रेख व कोल्ड स्टोरेज के लाभों का आकलन करने जैसे विषयों पर एफपीओ की महिला सदस्यों तथा सीईओ को प्रशिक्षित किया गया। इको-इनर्जी सौर आधारित कोल्ड स्टोरेज समिति के सदस्यों व सादलीम्मा औद्यानिक किसान उत्पादक कम्पनी लिमिटेड के किसान सदस्यों के लिए दो क्षमतावर्धक प्रशिक्षण आयोजित किये गये। इन प्रशिक्षणों में महिला व पुरूष दोनों शामिल थे। पहला प्रशिक्षण कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं के संचालन व रख-रखाव पर केन्द्रित था। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समिति के सदस्यों को दैनिक आधार पर प्रणाली का प्रबन्धन करने के लिए आवश्यक क्षमताओं से लैस करना था, जिसमें सामग्री की लोडिंग-अनलोडिंग, उत्पाद की गुणवत्ता बनाये रखने के लिए तापमान नियंत्रण व प्रणाली की सफाई आदि विषय शामिल थे। इसके अतिरिक्त, प्रतिभागियों को विद्युत कनेक्टिविटी व बादल तथा बारिश के दौरान सोलर चार्ज न होने की स्थिति में विद्युत कनेक्शन से जोड़ने के साथ-साथ विभिन्न स्तरों पर समस्या निवारण व ऑनलाइन सिस्टम निगरानी के बारे में निर्देश दिये गये। दूसरे प्रशिक्षण में विभिन्न औद्यानिक फसलों के प्रसंस्करण, पैकेजिंग व विपणन तकनीकों के बारे में प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया गया। इसके अतिरिक्त, विपणन घटक में ई-मार्केटिंग प्लेटफॉर्म व विभिन्न विपणन रणनीतियों के बारे में में भी बताया गया।
कर्नाटक के विभिन्न भागों से 6 उद्यमियों व परियोजना क्षेत्र की 10 महिला किसानों को शामिल करते हुए उद्यमिता विकास कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम मुख्य रूप से सौर ऊर्जा चालित कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं के उपयोग के माध्यम से प्राप्त किये जा सकने वाले विभिन्न व्यवसायिक अवसरों पर केन्द्रित था। इनमें मशरूम व डेयरी उत्पादों तथा अन्य जल्द खराब हो जाने वाली वस्तुओं का प्रसंस्करण शामिल है। इससे राजस्व के नये स्रोत सामने आ सकते हैं। इसके अतिरिक्त, सौर ऊर्जा चालित कोल्ड स्टोरेज जैसी गतिविधियों में निवेश करने के इच्छुक उद्यमियों के लिए बैंक से ऋण उपलब्धता में सहयोग करने के साथ-साथ कर्नाटक सरकार के उद्यान विभाग द्वारा प्रदान की जाने वाली सहायता के बारे में भी जानकारी प्रदान की गयी। औद्यानिक खेती में बाहर से लगने वाले निवेश तथा बाहर जाने वाले तैयार उत्पादों, तापमान के आँकड़ों, बादल छाये रहने के दौरान बिजली की खपत, कोल्ड स्टोरेज को किराये पर देने से होने वाली आय, औद्यानिक उत्पादों की गुणवत्ता व उत्पादों की शेल्फ लाइफ बढ़ने से होने वाले अतिरिक्त लाभ के आँकड़े एकत्र करने के लिए एफपीओ कार्यालय में एक लॉग बुक रखी गयी। संचालन व रख-रखाव पर एक तकनीकी मैनुअल विकसित कर एफपीओ के साथ साझा किया गया। सौर ऊर्जा चालित कोल्ड स्टोरेज के संचालन व रख-रखाव का बहुत कम काम होता है। मुख्य रूप से भण्डारण के लिए प्रति सप्ताह सिर्फ 20 लीटर पीने वाला पानी डालना व सौर पैनलों की महीने में एक बार साफ-सफाई करना होता है। इस प्रणाली को एक मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से संचालित किया जा सकता है, जिससे उपयोगकर्ता अपने उत्पादों के लिए भण्डारण तापमान निर्धारित कर सकते हैं, प्रणाली के संचालन की निगरानी कर सकते हैं व किसी भी समस्या की पहचान कर सकते हैं।
वर्तमान में इस प्रणाली का प्रबन्धन एफपीओ की एक महिला सीईओ द्वारा किया जाता है। सौर ऊर्जा चालित कोल्ड स्टोरेज का उपयोग करने हेतु परियोजना क्षेत्र के सभी किसानों का एफपीओ से बेहतर जुड़ाव है। एफपीओ ने अपने कार्यालय में एक बोर्ड भी लगाया हुआ है, जिस पर ‘‘पहले आओ, पहले पाओ’’ के सिद्धान्त के आधार पर इस सुविधा को लेने हेतु सम्पर्क नम्बर दिया गया है।
परिणाम
पारम्परिक ग्रिड से जुड़े कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं में पाँच दिनों की अवधि में उपज के भण्डार की लागत जहाँ 2 रू0 प्रति किग्रा है, वहीं एफपीओ उसी अवधि के लिए मात्र 1 रू0 प्रति किग्रा0 की दर से शुल्क लेता है। 11 दिसम्बर 2023 से 30 दिसम्बर, 2024 के बीच लगभग 60 किसानों ने कुल 1500 किग्रा0 खीरा, गुलाब व गेंदा जैसे औद्यानिक उत्पादों का भण्डरण किया। परिणामस्वरूप, सादलीम्मा औद्यानिक किसान उत्पादक कम्पनी लिमिटेड को किराये से रू0 40,000.00 की आय हुई।
इस कोल्ड स्टोरेज एवं उससे मिलने वाली सुविधाओं व सेवाओं से किसान संतुष्ट हैं। उनका कहना है कि, यह एक स्थिर तापमान बनाये रखती है, जिससे उपज खराब नहीं होती है और उसकी शेल्फ लाइफ बढ़ जाती है। इसके अलावा, सौर ऊर्जा चालित कोल्ड स्टोरेज के उपयोग की लागत में भी उल्लेखनीय कमी आयी है, जिससे पहले पारम्परिक कोल्ड स्टोरेजों में लगने वाली अधिक लागत के कारण चुनौतियों का सामना कर रहे छोटे किसानों के लिए यह एक उपयुक्त विकल्प बन गया है। सौर आधारित कोल्ड स्टोरेज प्रणाली के उपयोग से मिलने वाले नये व्यवसायिक अवसरों की जानकारी प्राप्त करके सादली गाँव की पाँच महिला किसानों के एक समूह ने भी 5 मीट्रिक टन क्षमता वाले सौर आधारित कोल्ड स्टोरेज की खरीद के लिए अनुदान प्राप्त करने हेतु उद्यान विभाग से सहायता मांगी है।
खाद्य पदार्थों की बरबादी में कमी, नवीकरणीय ऊर्जा पर निर्भरता व खाद्य सुरक्षा में वृद्धि के माध्यम से यह परियोजना सतत् विकास लक्ष्यों में भी योगदान देती है। सौर ऊर्जा चालित कोल्ड स्टोरेज का डिजाइन तैयार करने सहित परियोजना के सभी चरणों में, एफपीओ व उद्यान विभाग के साथ-साथ महिला व पुरूष दोनों किसानों की सक्रिय भागीदारी होने से समुदाय में स्वामित्व की भावना बलवती हुई है। एक तरफ किसान जहाँ कोल्ड स्टोरेज को एक सामुदायिक सम्पत्ति मानते हैं, तो वहीं दूसरी तरफ सरकारी विभागों की भागीदारी होने से जमीनी स्तर पर सहयोगात्मक प्रयासों की संभावना को भी बल मिलता है। सौर ऊर्जा तथा इससे समाज व पर्यावरण दोनों को होने वाले फायदों के बारे में किसानों व ग्रामीणों के बीच बढ़ती जागरूकता इस परियोजना का एक प्रमुख परिणाम है।
भावी रणनीति
टेरी ने इस क्षेत्र में सौर ऊर्जा से चलने वाले कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं की उपलब्धता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण प्रयास किये हैं। इन प्रयासों का मुख्य उद्देश्य इन तकनीकों तक लघु व सीमान्त किसानों की पहुँच सुनिश्चित करना है। इसके लिए, कर्नाटक के विभिन्न क्षेत्रों के 6 उद्यमियों को प्रशिक्षित किया गया है। इसके अतिरिक्त, इन लघु व सीमान्त किसानों के समूहों को अपना व्यवसाय स्थापित करने हेतु आसानी से ऋण उपलब्धता की दृष्टि से टेरी ने इन उद्यमियों व वेण्डरों के साथ-साथ भारतीय स्टेट बैंक जैसे राष्ट्रीयकृत बैंकों के साथ इनका जुड़ाव भी सुनिश्चित किया है। वर्तमान में, उद्यमी अपने लक्ष्यों व गतिविधियों पर सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं।
चिक्कबल्लापुर में टेरी द्वारा आयोजित एक हितभागी कार्यशाला के बाद, अन्य तहसीलों के एफपीओ सदस्यों ने भी अनुदान प्राप्त करने के लिए उद्यान विभाग से सम्पर्क किया है। उन्हांेने सौर आधारित कोल्ड स्टोरेज इकाईयों की खरीद के लिए आवश्यक धनराशि का 60 प्रतिशत निवेश करने की योजना तैयार की है। हम इस विेकेन्द्रीकृत समुदाय-केन्द्रित समाधान को आगे बढ़ाने हेतु अन्य विकल्पों पर भी विचार करेंगे।
सादली गाँव में महिलाओं व युवाओं की सक्रिय भागीदरी से सौर ऊजा चालित कोल्ड स्टोरेज परियोजना के सफल क्रियान्वयन से कर्नाटक के अन्य क्षेत्रों व उसके बाहर भी लोग उत्साहित हैं व इस मॉडल को अपनाने हेतु एक मजबूत ढाँचा तैयार कर रहे हैं। महिलाओं के समावेश को प्राथमिकता देकर, युवाओं को शामिल करके और समुदाय आधारित नवाचारों को बढ़ावा देकर इस परियोजना ने ग्रामीण कृषक समुदाय के आत्मविश्वास में वृद्धि की है। इसने न केवल लघु व सीमान्त किसानों की आजीविका में सुधार किया है, वरन् उत्पादों की बरबादी को भी कम किया है, खाद्य सुरक्षा को बढ़ाया है और कृषि क्षेत्र के स्थाई उन्नति में योगदान दिया है।
वाई. नागार्जु
वरिष्ठ मैनेजर, सतत् सेवाएं प्रबन्धन (एसएसएम)
ऊर्जा व संसाधन संस्थान (टेरी)
दक्षिण क्षेत्रीय केन्द्र, 4 मेन,
डोमुलर द्वितीय स्टेज, बंगलोर – 560 071, कर्नाटक
ई-मेल: nagarju@teri.res.in
वेबसाइट: www.teriin.org
Source: Technologies and Sustainable Agriculture, LEISA INDIA, Vol. 26, No.4, Dec 2024



