श्रीमती चाँदी बाई की प्रेरणादायक यात्रा

Updated on October 21, 2025

चाँादी बाई संगारेड्डी जिले के जहीराबाद मण्डल के एक गाँव अर्जुन नायक थाण्डा की रहने वाली हैं। यह बंजर जमीनों वाला एक शुुष्क क्षेत्र है जिस पर खेती करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। 3 बेटे, 3 बहुओं और छ पोते-पोतियों सहित उनके परिवार में कुल सदस्यों की संख्या 13 है। उनके परिवार की आजीविका का मुख्य स्रोत खेती है। चाँदी बाई के पास कुल 5 एकड़ जमीन है, जहाँ वह मुख्य रूप से खरीफ सीजन के दौरान ही फसल ले पाती हैं। चाँदी बाई मुख्य रूप से सोयाबीन और मक्का, दो ही फसलें ही उगाती थीं, जिनके बीज वे निजी डीलरों से खरीदती थीं। वह उनसे 3 प्रतिशत ब्याज पर रू0 20,000.00 का ऋण लेती थीं। वह जहीराबाद से हाईब्रिड बीज, रासायनिक उर्वरक और कीटनाशक खरीदती थीं।

वर्ष 2016 में, एक स्वैच्छिक संगठन दक्कन डेवलपमेण्ट सोसायटी ने अर्जुन नायक थाण्डा गाँव के लोगों के साथ काम करना प्रारम्भ किया। काम प्रारम्भ करने के 4 महीने बाद संस्था ने उनके मुद्दों पर काम करने के लिए एक संघम (समुदाय का एक समूह) गठित करने में सहायता दी। सदस्यों द्वारा राजी बाई के साथ चाँदी बाई को समूह के नेता के तौर पर चुना गया। 20 सदस्यों के साथ शुरू की गयी संघम में वर्ष 2024 तक सदस्यों की संख्या 60 हो गयी। संघम के अन्य सदस्यों के साथ चाँदी बाई ने बीज प्रबन्धन, जैविक खाद बनाने, पौधों को निकालने तथा कीट एवं बीमारियों के नियंत्रण की अन्य प्राकृतिक पद्धतियों के साथ-साथ मूल्य सवंर्धित उत्पादों को तैयार करने पर प्रशिक्षण एवं दिशा-निर्देशन प्राप्त किया।

दक्कन डेवलपमेण्ट सोसायटी और कृषि विज्ञान केन्द्र से मिले बहुमूल्य मार्गदर्शन, सहयोग और सहायता से वे अपने एक एकड़ खेत में बाजरा, मड़ुआ, दो प्रजाति की कंगनी, कोदो, पोरसो, चना, मूंग, उर्द राजमा आदि एवं तिल व अलसी सहित 20 से भी अधिक फसलों की खेती कर रही हैं। वे विभिन्न जैविक कृषि अभ्यासों के माध्यम से अपने खेत को पोषक बना रही हैं। अन्तिम जुताई के दौरान लगभग 10 ट्रैक्टर गोबर की खाद डाली जाती है। खेत में 100 किग्रा0 प्रति हेक्टेयर की दर से वर्मीकम्पोस्ट, गोबर व बकरी से अपशिष्ट मिश्रित पोषण से भरपूर खाद मिलायी जाती है। फसलों की विविधता सुनिश्चित करने के लिए, एक फसल के बाद दूसरी फसल की बुवाई पंक्तिवार करती हैं। फसल वृद्धि के लिए पंचगव्य और जीवामृत जैसे पारम्परिक जैविक तरल खादों का उपयोग करती हैं और कीट प्रबन्धन के लिए नीम के पत्ते का अर्क, नीम के बीज का रस, गुड़ का पानी और गौमूत्र का उपयोग करती हैं।

चाँदी बाई अपने खेत में रू0 25,050.00 लगाकर रू0 36,580.00 का शुद्ध लाभ प्राप्त करती हैं। खेती के अलावा, उन्होंने 4 बकरियां एवं 2 गाय पाल रखी हैं। अपनी कृषिगत गतिविधियों से वह रू0 36,580.00 की शुद्ध आय प्राप्त करती हैं और प्रत्येक दूसरे वर्ष अपने जानवरों को बेचकर वह 30,000-35,000.00 रू0 की अतिरिक्त आय प्राप्त करती हैं। जानवरों के लिए चारा सीधे अपने खेत से लाती हैं तथा आवश्यकता पड़ने पर गाँव में प्राकृतिक रूप से उपलब्ध वनस्पतियों से चारे की पूर्ति करती हैं।

अपने खेत पर उल्लेखनीय बदलावों को देखने के बाद चाँदी बाई बदलाव की प्रबल समर्थक बन गयीं और अपने साथी किसानों को इसी प्रकार की खेती करने हेतु उत्प्रेरित करने लगीं। चाँदी बाई कहती हैं, ‘‘हमारे खेत, स्वास्थ्य, पोषण और प्रचुरता को दर्शाते हैं।’’ अब गाँव के अधिक से अधिक किसान संघम से जुड़ने के प्रति उत्सुक हो रहे हैं और साथी किसानों एवं ग्रामीणों के जीवन में आये बदलावों को देखते हुए डक्कन डेवलपमेण्ट सोसायटी और कृषि विज्ञान केन्द्र के निर्देशन में जैविक खेती करने के प्रति प्रोत्साहित हो रहे हैं।

नोट: यह लेख डक्कन डेवलपमेण्ट सोसायटी-कृषि विज्ञान केन्द्र, जहीराबाद, संगारेड्डी, तेलंगाना, भारत- 502228 की डॉ0 एन. स्नेहलथा, वी. रमेश एवं ई. स्वामी द्वारा संकलित किया गया है। डॉ0 एन. स्नेहलथा से snehalatha.ddskvk@ddsindia.org पर सम्पर्क कर सकते हैं

 
 

Source: Technologies and Sustainable Agriculture, LEISA INDIA, Vol. 26, No.4, Dec 2024

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