पोषण वाटिकाओं से स्वास्थ्य व आय लाभ प्राप्त करना

Updated on October 21, 2025

भारत के आन्ध्र प्रदेश के वीरभद्रपुरम गाँव की रहने वाली जानकी बोब्बिली पोषण वाटिका पहल को अपनाने वाली प्रमुख महिला किसानों में से एक हैं। इस पोषण वाटिका पहल का उद्देश्य किसानों की आय में वृद्धि करने के साथ ही विभिन्न मौसमों में विविधतापूर्ण पौष्टिक भोजन तक ग्रामीण परिवारों की पहुँच सुनिश्चित करना है ताकि उनका स्वास्थ्य बेहतर रहे और वे कल्याणकारी जीवन जीने की तरफ अग्रसर हों। यह पहल ग्रामीण भारत में बदलाव की एक शक्तिशाली लहर पैदा कर रही है और ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए एक प्रभावी साधन बन कर उभरी है।

खाद्य सुरक्षा में सुधार के बावजूद, ग्रामीण भारत में कुपोषण, विशेष रूप से सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी एक बड़ी चिन्ता का विषय है। इसलिए 2021 में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने पोषण वाटिका पहल शुरू की। यह पहल ‘‘जो खाते हैं, वहीं उगायें और जो उगाते हैं, वहीं खाएं’’ के आदर्श वाक्य को ध्यान में रखते हुए नियोजित गृहवाटिका को प्रोत्साहित करती है। इस पहल के अन्तर्गत रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों का प्रयोग किये बगैर देशी प्रजाति की सब्ज़ियों, फलों, जड़ी-बूटियों और मसालों की खेती को प्रोत्साहित किया जाता है। साथ ही यह रसोई घर से निकले कचरे को जैविक खाद में बदलने को भी बढ़ावा देती है। इस प्रकार यह पहल बहुमूल्य कृषि जैव विविधता और जल संरक्षण में सहयोग करती है।

यद्यपि देश भर में पोषण वाटिका पहल के क्रियान्वयन के तरीके पर्यावरण व कृषि परम्पराओं के आधार पर काफी भिन्न हैं। उदाहरण के तौर पर, आन्ध्र प्रदेश सामुदायिक प्रबन्धित प्राकृतिक खेती (एपीसीएनएफ) कार्यक्रम, जो प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाकर खेती करने को बढ़ावा देता है, ने अपने एटीएम (एनी टाइम मनी) मॉडल के तहत् पोषण-वाटिका की शुरूआत की।

एटीएम मॉडल का उद्देश्य प्राकृतिक कृषि विधियों का उपयोग करके एक ही खेत में विभिन्न प्रकार की फसलों की रिले खेती को बढ़ावा देकर ग्रामीण युवाआंे को खेती की तरफ आकर्षित करना है। रिले खेती के अन्तर्गत अलग-अलग समय पर फसल की कटाई व बुवाई के कुछ सप्ताह के भीतर ही आय होनी सुनिश्चित हो जाती है। एटीएम मॉडल से सम्बन्धित जागरूकता अभियानों व प्रशिक्षण कार्यक्रमों में सक्रियता से सहभाग करने वाली जानकी देवी का कहना है, ‘‘युवा महिलाओं द्वारा पोषण वाटिका स्थापित करने से पहले, हम उन्हें इसके प्रत्येक चरण के बारे में प्रशिक्षित करते हैं।’’

एक किसान परिवार की सदस्य होने के कारण जानकी महिला किसानों के सामने आने वाली चुनौतियों से अच्छी तरह परिचित हैं। रसायन विज्ञान में स्नातक की उपाधि प्राप्त करने के बार और कृषि तकनीकों के उपर गहरी जानकारी प्राप्त करने के उद्देश्य से, इन्होंने एक स्थानीय स्वैच्छिक संगठन ‘‘सबला’’ द्वारा आयोजित आजीविका उद्यम विकास कार्यक्रम में सहभागिता की। इसक तुरन्त बाद, वर्ष 2016 में किसान उत्पादक समूहों के गठन व प्रशिक्षण में मदद करने के लिए जानकी सबला संगठन के साथ जुड़ गयीं। कृषि व किसान कल्याण कार्यक्रम के लिए रिसोर्स संगठन के तौर पर सबला प्राकृतिक खेती, जैविक उत्पादन व कमजोर महिलाओं के सशक्तिकरण पर विशेष जोर देता है।

जैव विविधता मेलों सहित विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से, सबला द्वारा भारत के पारम्परिक भोजन का हिस्सा रहे, सूखा प्रतिरोधी, पोषक तत्वों से परिपूर्ण मोटे अनाजों के उत्पादन उपभोग व स्थानीय स्तर पर खरीद को भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है। लम्बे समय से उपेक्षित होने के कारण, लोग धीरे-धीरे मोटे अनाजों की खेती की ओर उन्मुख हो रहे हैं। वर्ष 2022 में, जब जानकी ने आन्ध्र प्रदेश व तेलंगाना के लिए एक्सेस एग्रीकल्चर यंग आन्त्रप्रेन्योर चैलेन्ज फण्ड (एपीसीएनएफ) नामक पहल के बारे में सुना, तब इन्होंने अपनी सहयोगी श्यामला बोब्बिली एवं कोम्मू ईश्वर राव के साथ इसमें आवेदन करने का निश्चय किया। जानकी कहती हैं, ‘‘सबला प्राकृतिक खेती एवं कृषिगत जैव विविधता पर ग्रामीण महिलाओं व स्थानीय आदिवासी युवाओं के बीच जागरूकता निर्माण कर रही है, इसलिए हम आवेदन करने हेतु प्रोत्साहित हुए।’’

जब उनकी टीम को आन्ध्र प्रदेश में ग्रामीण एक्सेस के लिए युवा उद्यमियों में से एक के रूप में चुना गया तो वे बहुत खुश हुईं। तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला के दौरान, उनकी टीम को स्मार्ट प्रोजेक्टर प्राप्त हुआ, जिसमें एक्सेस एग्रीकल्चर प्रशिक्षण वीडियो की पूरी लाइब्रेरी थी। जब राष्ट्रीय कृषि विस्तार प्रबन्धन संस्थान (एमएएनएजीई) के महानिदेशक डॉ0 पी. चन्द्रशेखर ने सभी चयनित ग्रामीण एक्सेस टीमों से कहा, ‘‘अपने हाथों मंे इस जादुई बक्से के साथ, अब आप सुपर हीरो हैं, क्योंकि आप किसानों को कृषि पारिस्थितिकी व प्राकृतिक खेती के लाभांे को प्रभावी ढंग से दिखा सकते हैं’’ तब जानकी ने अपने-आप को विशेष रूप से सम्मानित महसूस किया।

तेलुगु भाषा में बने इस किसान-से-किसान शिक्षण के गुणवत्तापूर्ण वीडियो को दिखाने के बाद जब जानकी व उनकी टीम के सदस्यों ने महिला किसानों व आदिवासी युवाओं का उत्साह देखा, तब उन्हें इस कथन की सच्चाई का अनुभव हुआ। महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए, सबला ने 40 गाँवों की लगभग 1200 महिला किसानों के साथ मिलेट सिस्टर्स नामक एक नेटवर्क स्थापित किया और ‘‘आरोग्य मिलेट्स’’ नाम से मोटे अनाज प्रसंस्करण इकाई की स्थापना की। यह इकाई अपने सदस्यों को मोटे अनाजों से मूल्य सवंर्धित उत्पाद तैयार करने पर प्रशिक्षण देती है। जानकी कहती हैं, ‘‘स्मार्ट प्रोजेक्टर इन सभी सदस्यों के क्षमता निर्माण हेतु एक हथियार की तरह है।’’

सबला की ग्रामीण एक्सेस टीम बहुत से गाँवों में मृदा उर्वरता, जल संरक्षण, पौध स्वास्थ्य एवं जैविक उर्वरकों पर उन्नत अभ्यासों को प्रोत्साहन देने हेतु सम्बन्धित वीडियोज़ का प्रदर्शन करती है। इनमें, धान के पुआल से खाद बनाना, नारियल की जटा, सब्ज़ियों में मिलीबग का प्रबन्धन, धान के पुआल से मल्चिंग व प्राकृतिक रूप से सैनिक कीटों को मारना शामिल है। चूँकि एकीकृत खेती व पोषक उद्यान सबला की विशिष्टता रही है, इसलिए टीम द्वारा दिखाये गये वीडियोज़ में, मक्के की अरहर के साथ रिले खेती करना, लाइन से खेती करना, भिण्डी की अच्छी बुवाई करना, भिण्डी की देख-भाल करना, टमाटर के पौधों को सहारा देना, टमाटर की अच्छी देख-भाल, ताजे व सूखे टमाटरों का भण्डार, मिर्च का सुखाकर भण्डारण करना आदि भी शामिल हैं।

प्रत्येक वीडियो शो के बाद इस बात की चर्चा हमेशा की जाती है कि इन अभ्यासों को वे अपने सन्दर्भ में कैसे अपना सकते हैं? सबला ग्रामीण एक्सेस टीम स्मार्ट प्रोजेक्टर का उपयोग एटीएम मॉडल के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए करती है, जिसमें सब्ज़ियां, फूल, मोटे अनाज, दलहन व तिलहन शामिल हैं। किसान अपनी जमीन पर क्या उगाना चाहते हैं, यह उनका चुनाव होगा, लेकिन उन्हें एटीएम मॉडल में बताये गये प्रत्येक श्रेणी से कम से कम एक फसल/प्रजाति का चयन करना होगा। किसानों को अपने पोषण वाटिका में स्थानीय सब्ज़ियों जैसे- बैंगन, भिण्डी, टमाटर, मिर्च, प्याज, मूली, गाजर, शकरकन्द, लौकी, करेला, नेनुआ, तोरई, करी पत्ता, धनिया व पालक तथा मेथी जैसी पत्तेदार सब्ज़ियों की एक विस्तृत श्रृँखला को शामिल करने हेतु प्रोत्साहित किया जा रहा है। एटीएम मॉडल से की जाने वाली खेती में बहुत तेज गर्मी में भी फसलें बची रहती हैं, जिससे खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होती है।

इसे और विस्तार से बताते हुए सबला टीम कहती है, ‘‘आम तौर पर किसान इन फसलों को लगभग 400 वर्गमीटर खेत में उगाते हैं और चूँकि वे साल भर फसल काट सकते हैं, इसलिए वे साप्ताहिक आधार पर आय अर्जन करते हैं। आम तौर पर किसान अपनी पूरी उपज अपने गाँवों में ही बेच देते हैं। अगर गाँव में बिकने से बच जाता है, तभी हम उन्हें अन्य जिलों के संभावित खरीदारों से जोड़ते हैं।’’

कोटानुवारीपापेम गाँव की एक महिला किसान, सप्पला प्रमीला ने सबला की ग्रामीण एक्सेस टीम की मदद से अपने 4000 वर्गमीटर के खेत के टुकड़े पर रू0 9,600.00 के निवेश से एक एटीएम मॉडल स्थापित किया। इस मॉडल में इन्होंने 13 प्रकार की सब्ज़ियां, 3 प्रकार की फलियां, और गेंदा के फूल उगाने का विकल्प चुना। इससे उन्हें प्रति सप्ताह रू0 3,500.00 की आय हुई। केवल चार महीनों में, इन्होंने रू0 45,000.00 की कमाई की। इसके अतिरिक्त, इन्होंने अपने घर के उपयोग के लिए कोई सब्ज़ी नहीं खरीदी और उनके परिवार को रसायन-मुक्त, घर में उगाई गयी ताज़ी सब्ज़ियों की निरन्तर उपलब्धता सुनिश्चित हुई।

ग्रामीण एक्सेस टीम स्कूली बच्चों के साथ भी काम करती है। स्कूलों में बच्चों को खाद्य उत्पादन व जैव विविधता के बारे में जागरूक करने हेतु भी स्मार्ट प्रोजेक्टर का उपयोग किया जाता है। स्मार्ट प्रोजेक्टर प्राप्त करने के एक वर्ष के भीतर, जानकी व उनकी सहयोगियों ने लगभग 1000 लोगों को वीडियो दिखाया, जिनमें से 68 प्रतिशत महिलाएं व 78 प्रतिशत युवा थे। किसान संगठनों के सदस्यों को पोषण वाटिका स्थापित करने हेतु प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से, वे प्राकृतिक खेती पर सबला एवं एपीसीएनएफ के अपने वीडियो व सफल केस स्टडी भी दिखाते हैं। फॉलो-अप समूह चर्चाओं के दौरान, जानकी, जो स्वयं एक सक्रिय किसान हैं, वे अन्य किसानों को नये मॉडल को अपनाने के लिए प्रेरित करती हैं। अगस्त 2023 में, उनकी प्रतिबद्धता व अनुभव को देखते हुए जानकी को क्लस्टर एक्टिविस्ट के रूप में एपीसीएनएफ से जुड़ने हेतु आमंत्रित किया गया। आज जानकी एपीसीएनएफ से जुड़ कर प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का कार्य कर रही हैं।

जलवायु परिवर्तन के प्रति खाद्य प्रणालियांे को अधिक रिजीलियेन्स बनाने के लिए एक समग्र दृष्टिकोण की आवश्यकता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए सबला, प्राकृतिक खेती व पोषण वाटिकाओं को प्रोत्साहन देने के अलावा, मोटे अनाज आधारित खाद्य पदार्थों के मूल्यों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए भी इस स्मार्ट प्रोजेक्टर का उपयोग करने की योजना बना रही है। साथ ही सबला की भावी योजना यह भी है कि वह इसका उपयोग अपने स्वयं के जैव संसाधन केन्द्रों, व बाजरा, कटहल, मूंगफली व हल्दी प्रसंस्करण इकाईयों को बढ़ावा देने हेतुु भी करेगी।

अधिक जानकारी प्राप्त करने हेतु सुश्री जानकी बोब्बिली से मोबाइल नं0 9347399363 अथवा ई-मेल आई0डी bobbilijanaki02@gmail.com पर सम्पर्क किया जा सकता है।

टिप्पणी: यह लेख मूल रूप से वान मेले पी., मोहापात्रा एस., टाबेट एल एवं फ्लावो बी. द्वारा 2024 में लिखित है और ‘‘युवा परिवर्तनकारी: अफ्रीका व भारत में वीडियो का उपयोग कर यंग चेन्जमेकर्स: स्केलिंग एग्रोइकोलॉजी यूजिंग वीडियो इन अफ्रीका एण्ड इण्डिया’’, एक्सेस एग्रीकल्चर, ब्रसेल्स, के पेज नं0 175 पृष्ठ पर प्रकाशित है।

 
 

एक्सेस एग्रीकल्चर
 
 

Source: Youth and Agroecology, LEISA INDIA, Vol. 26, No.2, June 2024

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