महिलाओं के नेतृत्व में खेत उद्यम- महत्वहीन बाजरा की क्षमता को सामने लाना

Updated on March 5, 2025

ओडिशा में बाजरा के पुनरूद्धार ने महिला समूहों को गरीबी एवं कुपोषण का सामना करने में सहयोग प्रदान कर उनके बीच आत्मविश्वास की भावना उत्पन्न की है। ओडिशा मिलेट मिशन एवं मिशन शक्ति विभाग ने महिला स्वयं सहायता समूहों के नेतृत्व में समग्र ओडिशा में मोटे अनाज आधारित खेती उद्यमों को सफलतापूर्वक प्रोत्साहित किया है, आजीविका को सशक्त बनाया है और परिवार की आय में सुधार किया है।


ओडिशा 62 अनुसूचित जनजातियों एवं 13 विशिष्ट नाजुक आदिवासी समूहों का घर है। ओडिशा की सम्पूर्ण आबादी में अनुसूचित जनजातियों का प्रतिशत 22.85 है। वर्षों से, आदिवासी समुदाय, अधिकाँशतः पहाड़ी क्षेत्रों और मध्यम ढलान वाले स्थानों पर वर्षा आधारित खेती करते हुए अपनी आजीविका चला रहे हैं, जहाँ वे खेती की मिश्रित प्रणाली के अन्तर्गत पारम्परिक फसलों जैसे- मोटे अनाज, दलहन, अनाज, कन्द एवं जड़ वाली फसलों की खती करते हैं। आदिवासी महिलाएं अपने परिवार की आय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं जहाँ वे बुवाई, निराई-गुड़ाई, कटाई एवं उत्पादों के प्रसंस्करण जैसे कृषिगत कार्यों को अपने पुरूष सदस्यों के साथ बराबरी से करती हैं।

ओडिशा के आदिवासी क्षेत्रों में अत्यधिक मोटे अनाज परम्परागत रूप से लोगों के भोजन व फसल प्रणाली का अहम हिस्सा रहे हैं। चरम जलवायु परिस्थितियों में भी बने रहने के कारण मोटे अनाज जलवायु अनुकूलित फसल होते हैं और इन्हें कम कृषि निवेशों एवं संसाधनों की आवश्यकता होती है। इन पर कीटों का आक्रमण भी कम होता है। तथापि, मोटे अनाजों को धूप में सुखाना उन्हें डण्डों से पीटना, ओसाई करना, दाना व भूसा को अलग करना व साफ अनाज एकत्र करने की परम्परागत प्रसंस्करण प्रक्रिया आदिवासी महिलाओं के लिए काफी श्रमसाध्य होती है, क्योंकि इन कामों में उनका अत्यधिक समय जाता है। इसके अतिरिक्त, मोटे अनाज आकार, प्रकार एवं भूसी के मामले में अन्य अनाजों से अलग होने के कारण इनका सरल प्रसंस्करण सुनिश्चित करना मुश्किल होता है।

सरकारी विभागों के बीच सहयोग
इन चुनौतियों से निपटने के क्रम में, ओडिशा सरकार के कृषि एवं कृषक सशक्तिकरण विभाग द्वारा एक प्रमुख कार्यक्रम ओडिशा मिलेट मिशन का प्रारम्भ किया गया, जो मोटे अनाजांे को पुनर्जीवित करने वाले महिला नेतृत्व मोटे अनाज उद्यमों को सहयोग करता है। मिशन शक्ति विभाग के साथ मिलकर, प्रसंस्करण इकाई, मोटे अनाज शक्ति कैफे, मोटे अनाज शक्ति दुकान, मोटे अनाज शक्ति टिफिन केन्द्र, टेक-होम राशन, बायो-इनपुट केन्द्र, कस्टम हायरिंग केन्द्र समुदाय प्रबन्धित बीज बैंक जैसे 2000 से अधिक उद्यमों को स्थापित करने, उनका नेतृत्व करने, संचालन एवं प्रबन्धन करने में महिला स्वयं सहायता समूह उल्लेखनीय भूमिका निभा रही हैं।

ओडिशा सरकार के कृषि एवं कृषक सशक्तिकरण विभाग के प्रधान सचिव श्री अरबिन्दा कुमार पाधी कहते हैं, ‘‘ओडिशा मिलेट मिशन अपने प्रारम्भ से लेकर अन्त तक मूल्य श्रृंखला हस्तक्षेपांे एवं मापनीय व नवोन्वेषी गतिविधियों की पहचान के कारण ओडिशा मिलेट मिशन एक विशिष्ट कार्यक्रम है।’’ इसके उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए प्रधान सचिव कहते हैं, ‘‘ओडिशा मिलेट मिशन, महिला स्वयं सहायता समूहों को शामिल करने तथा प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और विपणन में महिलाओं को नेतृत्व भूमिका लेने हेतु प्रशिक्षित करने के साथ मोटे अनाज की समग्र मूल्य श्रृंखला में सक्रिय सहभागिता को बढ़ावा देते हुए महिलाओं के सशक्तिकरण पर भी केन्द्रित करता है।’’ वर्ष 2017 में शुरू हुए इस मिशन कों 7 जिलों के 30 विकासखण्डों में प्रारम्भ किया गया। आगे चलकर 2023 में इस मिशन के अन्तर्गत सभी 30 जिलों के 177 विकासखण्ड आच्छादित हो गये। अब तक राज्य के सभी विकास खण्डों एवं शहरी स्थानीय निकायों में 6 लाख समूहों में लगभग 70 लाख महिलाओं को संगठित किया गया है।

मिशन शक्ति विभाग का उद्देश्य ऋण उपलब्धता एवं बाजार से जुड़ाव स्थापित कर आयजनक गतिविधियों के माध्यम से महिलाओं को सशक्त करना है। मिशन शक्ति के अन्तर्गत महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं का सशक्तिकरण ओडिशा सरकार का एक प्रमुख कार्यक्रम है। यह परिकल्पना की गयी है कि समय के साथ-साथ महिला स्वयं सहायता समूहों से अधिक से अधिक महिलाओं का जुड़ाव होगा।

महिलाओं के नेतृत्व में खेत उद्यम
ओडिशा मिलेट मिशन एवं मिशन शक्ति विभाग के बीच सहभागिता से पूरे राज्य में स्वयं सहायता समूहों के लिए महिलाओं के नेतृत्व में खेत उद्यम स्थापित करने में मदद मिली है। इन उद्यमों में 7 महिला स्वयं सहायता समूह 3 डेक रागी क्लीनर-ग्रेडर-डेस्टोनर इकाईयों (2-3 कुन्तल प्रति घण्टा क्षमता), 14 महिला स्वयं सहायता समूह 3 डेक रागी क्लीनर-ग्रेडर-डेस्टोनर इकाईयों (10-12 कुन्तल प्रति घण्टा क्षमता), 35 महिला स्वयं सहायता समूह 2 डेक रागी क्लीनर-ग्रेडर-डेस्टोनर इकाईयों, 20 महिला स्वयं सहायता समूह सूक्ष्म मोटे अनाज डिहस्लर इकाईयों, 975 महिला स्वयं सहायता समूह पल्वराइजर इकाईयों, 738 महिला स्वयं सहायता समूह थ्रेशर इकाईयों, 59 महिला स्वयं सहायता इकाईयां एकीकृत बाल विकास सेवा कार्यक्रम के अन्तर्गत टेक-होम-राशन इकाईयों और 2 महिला स्वयं सहायता समूह एक एकीकृत सूक्ष्म मोटे अनाज क्लीनर-ग्रेडर-डेस्टोनर इकाई के साथ जुड़ी हुई हैं। यहाँ पर कुछ सफल कहानियों को प्रस्तुत किया जा रहा है-

सफल कहानी – 1
साबरी महिला स्वयं सहायता समूह कोरापुट जिले के बोईपारीगुडा विकास खण्ड के दोरागुडा गाँव में स्थित है। यह बोईपारीगुडा विकास खण्ड के उन 10 महिला स्वयं सहायता समूहों में से एक है, जिसने आदिवासी महिला किसानों का कार्यबोझ घटाने के उद्देश्य से कार्यक्रम के अन्तर्गत रागी थ्रेशर- कमपीयरलर प्राप्त किया है। पहले ये आदिवासी महिला किसानं रागी की थ्रेशिंग के लिए परम्परागत तरीकों पर निर्भर थीं, जो उनके प्रसंस्करण के खर्चों को बढ़ाता था। ये महिलाएं, रागी को सुखाने और हाथ से बीजों को निकालने में प्रतिदिन औसतन 5-6 घण्टे लगाती थीं। इस प्रक्रिया में 3 से 5 दिन लगते हैं और लागत भी अत्यधिक लगती है जो महत्वपूर्ण है। रागी थ्रेशर लगाने के बाद, महिला स्वयं सहायता समूह प्रभावी तरीके से उच्च-गुणवत्ता वाली रागी को प्रसंस्कृत करती हैं। साबरी महिला स्वयं सहायता समूह ने असाधारण रूप से अच्छा प्रदर्शन किया और प्रसंस्करण इकाई से अच्छी आय अर्जित की। अन्य महिला किसान अपने खेतों से रागी कटने के बाद उन्हें प्रसंस्कृत करने के लिए साबरी महिला स्वयं सहायता समूह द्वारा प्रबन्धित की जा रही रागी थ्रेशर मशीन पर लेकर आती हैं और समूह द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं के बदले रू0 1.00 प्रतिकिग्रा0 की दर से भुगतान करके जाती हैं। रागी कटाई अवधि के दौरान इस महिला स्वयं सहायता समूह को औसतन रू0 10,000.00 प्रतिमाह की आय होती है।

साबरी महिला स्वयं सहायता समूह की अध्यक्षा चंचला माझी कहती हैं, ‘‘हम मोटे अनाजों की खेती करने वाले किसानों को रागी थ्रेशर भी किराये पर उपलब्ध कराते हैं। हम रागी प्रसंस्कृत करने हेतु रू0 100.00 प्रति कुन्तल की दर से शुल्क लेते हैं।’’ थ्रेशर 3-4 कुन्तल रागी प्रतिदिन प्रसंस्कृत करते हैं। रागी की थ्रेशिंग करने में पहले जहाँ 5-6 दिन लगता था, अब थ्रेशर का उपयोग करने से वह समय घट कर मात्र 1 दिन रह गया है। साबरी महिला स्वयं सहायता समूह की सचिव भारती तारापुतिया कहती हैं, ‘‘हम उन किसानों को अपना लक्ष्य बनाते हैं, जो रागी की थ्रेशिंग करने में परम्परागत तरीकों का इस्तेमाल करते हैं और इस प्रकार हम उनका समय, लागत और श्रम बचाते हैं।’’ चंचला माझी जोड़ती हैं, ‘‘रागी थ्रेशर इकाई से किसानों एवं महिला स्वयं सहायता समूह की महिला सदस्य दोनों की आय बढ़ती है। इससे हमारी आजीविका मजबूत हुई है।’’

सफल कहानी – 2
कोरापुट जिले के मनकडाबेडा गाँव में स्थित मां संतोषी महिला स्वयं सहायता समूह, 3 हार्सपावर की सिंगल फेज़ वाली एक पल्वराइज़र मशीन को प्रबन्धित करती है। महिला स्वयं सहायता समूह की अध्यक्षा गौरी गुण्टा कहती हैं, ‘‘पल्वराइज़र के उपयोग के साथ, रागी को महीन आटे में बदलना बहुत आसान हो गया है। मशीन उपलब्ध कराने और इसे संचालित करने हेतु हमें प्रशिक्षित करने के लिए ओडिशा मिलेट मिशन एवं मिशन शक्ति को धन्यवाद।’’ अपने रागी को प्रसंस्कृत करने हेतु स्थानीय किसान अक्सर पल्वराइज़र इकाई पर आते रहते हैं। 1 किग्रा0 रागी की पिसाई करने हेतु स्वयं सहायता समूह रू0 4.00 की दर से पैसा लेती हैं। पल्वराइज़र मशीन एक घण्टे में 15-20 किग्रा0 रागी पीस देती हैं। महिला स्वयं सहायता समूह ने पिछले वर्ष पल्वराइज़र इकाई से लगभग रू0 50,000.00 आय अर्जित की थी। गुण्टा कहती हैं, ‘‘हम प्राप्त आय का अपने समूह के सभी सदस्यों में बराबर बंटवारा कर देते हैं।’’ आगे जोड़ते हुए वह कहती हैं, ‘‘क्षेत्र की अधिक से अधिक महिला स्वयं सहायता समूह पल्वराइज़र इकाई स्थापित करने में रूचि ले रही हैं।’’

सफल कहानी – 3
सुन्दरगढ़ जिले के कुतरा विकासखण्ड से आने वाली मिनते कुजूर का जीवन चुनौतियांे भरा रहा है। आय के मुख्य स्रोत के रूप में खेती से अपने बच्चों की पढ़ाई-लिखाई कराना उनके लिए बहुत कठिन था। वर्ष 2022 में मिनते कुजूर और ज्योति महिला स्वयं सहायता समूह की अन्य सदस्यों ने ओडिशा मिलेट मिशन से एक पल्वराइज़र प्राप्त किया। रिसोर्स पर्सन द्वारा प्रशिक्षण पाने के बाद, दस सदस्यों में से 3 महिलाएं मशीन चलाने लगीं और प्रति किग्रा0 रू0 5.00 की दर से पैसा लेते हुए लगभग रू0 7,000.00 प्रतिमाह आय अर्जित कर रही हैं। पल्वराइज़र से न केवल रागी की पिसाई होती है, वरन् तीसी, हल्दी एवं गेंहूं की भी पिसाई होती है। यह पहल आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और क्षमता वर्धन एवं संसाधन प्रबन्धन के माध्यम से महिला सशक्तिकरण पर बाहरी सहयोग के ठोस प्रभाव को प्रदर्शित किया है। ओडिशा मिलेट मिशन के क्रियान्वयन का अनुसरण करते हुए महिला स्वयं सहायता समूह के सदस्यों को अपने परिवारों एवं समुदायों में मिलने वाले सम्मान में वृद्धि हुई। इसके अतिरिक्त, वे वित्तीय रूप से सशक्त हो रही हैं और अपने बच्चों को बेहतर स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिलाने हेतु सक्षम हो रही हैं और भावी पीढ़ी हेतु उन्नत विकल्पों को तैयार करने में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं।

सफल कहानी – 4
छोटे मोटे अनाज परम्परागत रूप से वर्षा आधारित फसलें हैं, जो नुआपाड़ा क्षेत्र की उंची जमीनों में बहुतायत से उगायी जाती हैं। कम अवधि की प्रजाति होने के साथ-साथ इसे व्यापक रूप से नकदी फसल के रूप में माना जाता है। इसके साथ ही यह पारम्परिक भोजन का एक हिस्सा भी है। फिर भी, छोटे मोटे अनाज- जैसे सांवा, कोदो आदि की हाथ से छिलके उतारने की परम्परागत पद्धति के कारण एक किग्रा0 अनाज को हाथ से कूटने में दो घण्टे से अधिक का समय व श्रम लगता है। सुदूर क्षेत्रों में छोटे मोटे अनाजों के कूटने में महिलाओं के लगने वाले कठिन श्रम को कम करने के उद्देश्य से सहभागी मशीनरी विकास दृष्टिकोण के माध्यम से परिवार स्तर पर काम करने वाले एक छोटे मोटे अनाज कूटने वाली मिक्सी को विकसित किया गया। नुआपाड़ा जिले में इस पायलट पहल ने महिलाओं में उल्लेखनीय रूचि जगाई और पूरे राज्य में छोटे मोटे अनाजों के उत्पादन और उपभोग को पुनर्जीवित करने की दिशा में इस कम-लागत तकनीक की संभावना को प्रदर्शित किया।

ओडिशा मिलेट मिशन ने एक ऐसी छोटे मोटे अनाज कूटने की मिक्सी को प्रस्तुत किया, जो एक घण्टे में लगभग 4 किग्रा0 छोटे मोटे अनाजों को प्रसंस्कृत कर सकती है। इस एक घण्टे में बीज निकालना, छानना और उपयोग के बीच-बीच में मशीन को ठण्डा करने हेतु बन्द कर देना सभी शामिल हैं। वर्तमान में बड़े पैमाने पर उपलब्ध नियमित मशीनों को मोडिफाई करके इस मशीन को विकसित किया गया। यह मशीन न केवल कम लागत की अर्थात् रू0 5,000.00 से कम लागत की तकनीक थी, वरन् इसमें उपयोग करने हेतु सभी विशिष्टताएं अच्छी तरह से विकसित की गयी थीं। इस मशीन को सिंगल फेज विद्युत से संचालित किया जा सकता है और इसके लिए किसी अतिरिक्त बुनियादी ढांचे की आवश्यकता नहीं है।

सफलता के कारक
ओडिशा मिलेट मिशन एवं मिशन शक्ति के बीच सहयोग से फल-फूल रहे महिलाओं के नेतृत्व में खेत उद्यमों की सफलता के पीछे विभिन्न कारक हैं। सफलता का सबसे पहला और बड़ा कारक यह है कि सबसे पहले महिला स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों का सघन क्षमतावर्धन किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रमों, कार्यशालाओं एवं एक्सपोजर भ्रमणों के माध्यम से मिशन ने महिला किसानों के क्षमतावर्धन पर केन्द्रित किया। इससे मोटे अनाजों की खेती, प्रसंस्करण एवं विपणन में उनके ज्ञान एवं दक्षता में वृद्धि हुई। सफलता के पीछे दूसरा कारण यह रहा कि मिशन के अन्तर्गत, महिला स्वयं सहायता समूहों को अपने उद्यम चलाने हेतु प्रसंस्करण मशीने उपलब्ध कराई गयीं। और तीसरे कारक के रूप में, कृषिगत सेक्टर में महिलाओं की सहभागिता एवं सशक्तिकरण को प्राथमिकता देने की राज्य की नीतियां सहायक रहीं। इन सभी ने मिलकर महिलाओं के नेतृत्व में खेत उद्यम को विकसित होने के लिए उपयुक्त वातावरण का निर्माण किया। इनके साथ, महिला किसानों की दृढ़ संकल्प एवं उद्यमशीलता की भावना ने इन उद्यमों की सफलता में योगदान दिया।

निष्कर्ष
महिलाओं के नेतृत्व वाले ये उद्यम उनके अपने समुदाय में मोटे अनाजों को शामिल करने और बढ़ावा देने के साथ ही उनके पोषण एवं आजीविका सुरक्षा को सुनिश्चित कर रहे हैं। साथ ही मोटे अनाज अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए प्रोत्साहन भी मिल रहा है। ओडिशा मिलेट मिशन कार्यक्रम के विस्तार के साथ, इसी प्रकार के और उद्यमों की आवश्यकता है। मिशन को विस्तारित करना होगा, जिससे अधिक से अधिक महिला किसान और महिला स्वयं सहायता समूह शामिल होंगे और ओडिशा के अन्य क्षेत्रों में गतिविधियांे का दुहराव होगा। इससे मिशन की पहुंच और प्रभाव व्यापक होगा। बड़े पैमाने पर गरीबी कम करने और महिलाओं के सशक्तिकरण में योगदान मिलेगा। खेत से प्लेट तक मोटे अनाजों की मूल्य श्रृंखला को आगे बढ़ाने में महिला स्वयं सहायता समूह एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ओडिशा में मोटे अनाजों के पुनरूद्धार से महिला समूहों के बीच आत्मविश्वास की भावना उत्पन्न हुई है। इससे उन्हें गरीबी और कुपोषण से निपटने में मदद मिल रही है। ओडिशा मिलेट मिशन मॉडल ने मोटे अनाज आधारित उद्यमों को स्थापित करने में महिला स्वयं सहायता समूहों की मदद की है जो कुपोषण व बेरोजगारी को दूर करने और मोटे अनाज के खेती क्षेत्र को बढ़ाने हेतु प्रेरित करने में एक व्यापक समाधान बन सकता है।


अभिजीत मोहन्ती
प्रोग्राम मैनेजर-नॉलेज बिल्डिंग
वॉटरशेड सपोर्ट सर्विसेज एण्ड एक्टिविटीज नेटवर्क, ओडिशा
ई-मेल: abhijitmohanty10@yahoo.com

भेषजा चौधरी
मीडिया एण्ड कम्यूनिकेशन कोआर्डिनेटर
वॉटरशेड सपोर्ट सर्विसेज एण्ड एक्टिविटीज नेटवर्क, ओडिशा
ई-मेल: bhesaja@gmail.com

त्रिनाथ तारापुतिया
क्षेत्रीय समन्वयक
वॉटरशेड सपोर्ट सर्विसेज एण्ड एक्टिविटीज नेटवर्क, ओडिशा
ई-मेल: trinath.b2793@gmail.com


Source: Millets Farming Systems, LEISA INDIA, Vol. 25, No.1, March. 2023

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