कमजोर पारिस्थितिक प्रणालियों से प्रभावित छोटी जोत के कृषि आजीविका वाले किसानों के लिए विविधीकरण आगे बढ़ने का एक तरीका है। दुग्ध उत्पादन हेतु पशुपालन उनमें से एक है। विदर्भ में दुग्ध उत्पादक किसानों ने संगठित होकर श्री कामधेनु डेयरी फार्मर लिमिटेड नाम से एक फार्मर प्रोड्यूसर आर्गनाइजेशन (एफपीओ) का गठन किया। यह एफपीओ दुग्ध उत्पादन को बढ़ाने हेतु विभिन्न प्रकार की सेवाएं उपलब्ध कराने एवं उनके कार्य सफलतापूर्वक कर रहा है।
महाराष्ट््र का विदर्भ क्षेत्र सूखा और फसल की बरबादी के लिए मुख्य रूप से जाना जाता है। अधिकाँश किसान आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर करते हैं। कमजोर वर्षा आधारित पारिस्थितिक प्रणाली, खराब मृदा, खेती की उच्च निवेश लागत, कीटों एवं बीमारियों की समस्या, फसल चयन एवं अत्यधिक निर्भरता, ऋण की सीमित उपलब्धता, बाजार सम्बन्धी चुनौतियां जैसे प्रतिकूल कारक मिलकर विशेषतः कपास की खेती करने वाले किसानों के लिए खेती को और अधिक जोखिमपूर्ण व कम लाभकारी बनाते हैं। लगातार होने वाले घाटे तथा उसके कारण उत्पन्न हुई निराशाजनक परिस्थितियों ने किसानों को संकट में डाल दिया है और कई बार वे आत्महत्या जैसे खतरनाक कदम भी उठा लेते हैं।
चुनौतियों से निपटने हेतु विविधीकरण एक बेहतर तरीका है। दुग्ध उत्पादन हेतु पशुपालन उनमें से एक है। पशुधन विकास परिवारों के लिए अतिरिक्त आय प्राप्त करने अवसर प्रदान करता है। यह लेख कृत्रिम गर्भाधान और बहुत सी सहायक गतिविधियों के माध्यम से बेहतर दुग्ध उत्पादन के लिए स्थानीय पशुओं और भैंसों की नस्लीय क्षमता को सुधारने के लिए किये गये प्रयासों को दर्शाता है।
पहल
वर्ष 2016 में बाएफ द्वारा पशु प्रजनन केन्द्र का प्रारम्भ किया गया। गुणवत्तापूर्ण पशुओं की नस्लें तैयार करने हेतु सेवाओं का एक समूह प्रदान किया गया। बाएफ ने कृत्रिम गर्भाधान की सेवाएं दरवाजे पर ही उपलब्ध करानी प्रारम्भ की और परिणामस्वरूप, पाँच वर्षों में इस क्षेत्र में 940 मादा बछड़ों का जन्म हुआ (देखें तालिका 1)। प्रारम्भ में, इस विषय पर ज्ञान व जानकारी का अभाव होने के कारण किसानों के बीच कृत्रिम गर्भाधान को प्रोत्साहित करने में बहुत कठिनाई का सामना करना पड़ा। किसानों की सोच में परिवर्तन लाना एक बड़ी चुनौती थी। धीरे-धीरे, जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से, किसान दुग्ध उत्पादन हेतु पशुपालन व्यवसाय में आने के लिए जागरूक हुए।
दुग्ध उत्पादन में वृद्धि
पशुओं की संख्या बढ़ने के साथ-साथ दुग्ध उत्पादन भी बढ़ा है। क्षेत्र के दुग्ध उत्पादन के आँकड़े भारी वृद्धि का संकेत देते हैं। वर्ष 2016 में, 6 गाँवों- परसोदी, लाडगांव, केदारपुर, कुकड़ी, पंजारा, परदी एवं बारगांेडी से केवल 150 लीटर दूध का उत्पादन दर्ज किया गया था। वर्ष 2020 में, इन्हीं 6 गाँवों में, प्रतिदिन 1250 लीटर दूध का उत्पादन होने लगा। व्यापार की इस संभावना को देखते हुए, वर्ष 2021 में, 17 गाँवों के 150 से अधिक किसान दुग्ध उत्पादन व्यापार में सहभागी बने और दुग्ध उत्पादन बढ़कर 2500 लीटर प्रतिदिन हो गया (देखें तालिका 1)।
उत्पादित दूध को बेचना एक बड़ी चुनौती के रूप में किसानों के सामने आया। किसानों के सामने आने वाली चुनौतियां निम्नवत् थीं –
* दूध का उत्पादन तो बढ़ गया, लेकिन अपने उत्पादों को बेचने हेतु किसानों के लिए बाजार नहीं उपलब्ध था।
* कुछ खरीददार मिले भी, परन्तु वे उनके उत्पादों का बेहतर दाम नहीं देते थे।
* उन्हें अपना दूध बेचने के लिए दूर-दराज के विकासखण्डों में जाना पड़ता था, लेकिन आस-पास कोई डेयरी अथवा शीतलन संयंत्र न होने से भण्डारण एक बड़ी समस्या थी।
* खुदरा विक्रेता किसानों के उत्पादों को खरीदकर मूल्यवर्धक दुग्ध उत्पादक सामान तैयार करते थे।
* किसानों ने अपने ही विकासखण्ड में घर-घर जाकर लोगों को दूध बेचने का तरीका ढूंढा, लेकिन यह बहुत कष्टकारी और समय लेने वाला तरीका था।
तालिका 1: दुधारू जानवरों, दुग्ध उत्पादन एवं इसमें जुड़े किसानों की वर्षवार बढ़ती संख्या
| वर्ष | दुधारू जानवर (संख्या) | दुग्ध उत्पादन (ली0 में) | संलग्न किसान (संख्या) |
| 2016 | 91 | 261 | 43 |
| 2017 | 113 | 430 | 53 |
| 2018 | 223 | 750 | 67 |
| 2019 | 249 | 983 | 79 |
| 2020 | 263 | 1250 | 89 |
| 2021 | 443 | 2500 | 151 |
फार्मर प्रोड्यूसर आर्गनाइजेशन का गठन
मौजूदा स्थिति के महत्व को ध्यान में रखते हुए, जमीनी स्तर पर चुनौतियों से निपटने हेतु एक फार्मर प्रोड्यूसर आर्गनाइजेशन के गठन पर एक रणनीतिक निर्णय लिया गया। परिणामस्वरूप, पशुपालन से जुड़ी सभी प्रकार की सेवाओं/समाधानों के लिए एक केन्द्र उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एक एफपीओ का गठन किया गया। क्षेत्र में दुग्ध उत्पादन आधारित फार्मर प्रोड्यूसर कम्पनी के गठन एवं संचालन में सहयोग देने नाबार्ड आगे आया। वर्ष 2020 में, नाबार्ड की उत्पादक संगठन विकास अनुदान के अन्तर्गत, श्री कामधेनु डेयरी फार्मर प्रोड्यूसर कम्पनी लिमिटेड नाम से एक एफपीओ की स्थापना की गयी। नाबार्ड ने इस एफपीओ को वर्ष 2020-2022 तक 3 वर्षों तक वित्तीय सहयोग प्रदान किया।
श्री कामधेनु डेयरी फार्मर प्रोड्यूसर कम्पनी लिमिटेड का पंजीकरण वर्ष 2020 में नागपुर में कम्पनीज अधिनियम के तहत् किया गया। 17 गाँवों के 362 दुग्ध उत्पादकों को मिलाकर एफपीओ का गठन किया गया जिसमें से 224 अर्थात 61.87 प्रतिशत किसान अंशधारक लघु एवं सीमान्त किसान हैं, जिनके पास 2 हेक्टेयर से भी कम कृषि भूमि है। 11 सितम्बर 2020 को गठित इस एफपीओ के निदेशक मंडल में डेयरी एवं दूध संग्रहण केन्द्र चलाने के अनुभव रखने वाले विभिन्न दक्षता सम्पन्न 10 युवा शामिल हैं। इन चयनित निदेशक मंडल में 4 महिला एवं 6 पुरूष सदस्य हैं। फार्मर प्रोड्यूसर कम्पनी के पास रू0 10.00 लाख की अधिकृत पूँजी और रू0 5.00 लाख की देय पूँजी है।
एफपीओ के प्रबन्धन एवं प्रशासन पर निदेशकों, सीईओ एवं अंशधारकों के क्षमता निर्माण पर जोर दिया गया। एफपीओ के माध्यम से व्यापर नियोजन विकसित करने व आगे जुड़ाव स्थापित करने, दूध का प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन तथा डेयरी प्रसंस्करण पर जागरूकता अभियान चलाने पर विशेष जोर दिया गया। मूल्य संवर्धन एवं दूध प्रसंस्करण, लाभ-हानि की गणना एवं एफपीओ के प्रशासन पहलुओं पर सीईओ को प्रशिक्षित किया गया। आगे चलकर, प्रसंस्करण इकाई स्थापित करने, बाजार से जुड़ाव बनाने तथा इन सब कार्यों के लिए आवश्यक लाइसेंस प्राप्त करने आदि पर भी दिशा-निर्देश दिया गया।
निवेश आपूर्ति, मूल्य संवर्धन एवं विपणन सम्बन्धी निम्न सेवाएं श्री कामधेनु डेयरी फार्मर प्रोड्यूसर कम्पनी लिमिटेड द्वारा प्रदान की जाती हैं-
निवेश आपूर्ति
* दरवाजे पर कृत्रिम गर्भाधान की सुविधा (अंशधारकों एवं अन्य किसानों से लिये जाने वाले सुविधा शुल्क की दरों में अन्तर होता है।)
* जानवरों में खनिज की कमी को दूर करने हेतु अच्छी गुणवत्ता के खनिज मिश्रण को उपलब्ध कराना।
* जानवरों के भोजन प्रबन्धन हेतु चारा की उन्नत प्रजातियां उपलब्ध कराना।
* बाजार की अपेक्षा सस्ते दरों पर गुणवत्तापूर्ण पशु आहार की आपूर्ति करना।
* किसानों को साइलेज बनाने हेतु प्रोत्साहित करना और एफपीओ द्वारा स्वयं साइलेज का उत्पादन व विक्रय करना।
मूल्य संवर्धन
* दूध का प्रसंस्करण कर खोवा, पनीर, दही, बटरमिल्क, घी, मिठाइयां, श्रीखंड आदि के रूप में मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करना।
* कपास, सोयाबीन और तूर की फसलों के कृषि अपशिष्टों को एकत्र करना और प्रसंस्करणकर्ता को आपूर्ति करना।
उत्पादन विपणन – आगामी जुड़ाव
* विकासखण्ड स्तर पर डेयरी के सभी उत्पादों की एक ही स्थान पर बिक्री के लिए एक आउटलेट की स्थापना करना।
* उपभोक्ताओं को अन्य डेयरियों/बड़े ब्राण्डों की तुलना में सस्ते दरों पर अच्छी गुणवत्ता वाले दूध की घर तक आपूर्ति सुनिश्चित करना।
* किसानों को जैविक खाद उपलब्ध कराना। (केंचुओं के साथ वर्मी कम्पोस्ट)
* किसी भी विषय पर किसानों की आवश्यकता एवं उनको पूरा करने के लिए बैठकें करना, उन पर कार्य करना।
प्रारम्भ में, छोटे स्तर पर विभिन्न दुग्ध उत्पादकों के उत्पादन में शामिल एक समूह गाँव में खोवा उत्पादन में शामिल था। एफपीओ की स्थापना के बाद, इस इकाई को भी एफपीओ में समाहित करने का निर्णय लिया गया। प्रारम्भ में सिर्फ दूध की बिक्री की जाती थी, लेकिन अब मूल्य सवंर्धित उत्पादों जैसे- पनीर, श्रीखंड, दही, बटरमिल्क, मक्खन आदि बनाकर भी बेचा जाता है। प्रारम्भ में, यह काम छोटे पैमाने पर शुरू किया गया था, लेकिन धीरे-धीरे यह व्यवसायिक गतिविधि के तौर पर विकसित हो गयी।
महिला केन्द्रित दृष्टिकोण
इस पहल को महिला केन्द्रित बनाना प्रमुख रणनीतियों और सीखों में से एक रही। डेयरी व्यवसाय की प्रक्रिया और सफलता का एक प्रमुख कारक महिलाओं की सहभागिता है, क्योंकि पशुपालन का प्रबन्धन, दूध निकालने से पशुओं का समग्र प्रबन्धन करने आदि में महिलाएं सर्वाधिक सक्रिय रहीं। इसीलिए, महिलाओं द्वारा संचालित पशुधन प्रबन्धन अभ्यासों को उन्नत बनाने पर जोर दिया गया। स्वच्छ एवं साफ-स ुथरे उत्पाद उपलब्ध कराने हेतु स्वच्छ वातावरण में दूध निकालने हेतु 100 से अधिक महिला पशुपालकों को बढ़ावा दिया गया।
दस पशु प्रबन्धन अभ्यास, जिनके माध्यम से प्रभावी ढंग से पशुपालन के साथ-साथ आय बढ़ाने पर अतिरिक्त जोर दिया गया, उन्हें बाक्स सं0 1 में प्रदर्शित किया जा रहा है-
| बाक्स 1: डेयरी व्यवसाय के बेहतर प्रबन्धन हेतु महिलाओं द्वारा अपनाये गये दस प्रबन्धन अभ्यास ऽ परिवार स्तर पर दुग्ध उत्पादन को बढ़ाने हेतु कृत्रिम गर्भाधान व जानवरों की उन्नत प्रजातियों को बढ़ावा देना। ऽ जानवरों के स्वास्थ्य को बनाये रखने हेतु कृमिनाश एवं टीकाकरण कार्यक्रम को पूरा करना। ऽ परम्परागत पशुचिकित्सकों के माध्यम से पशुओं का प्राथमिक उपचार करना। ऽ चारा उत्पादन- महिलाएं चारा फसलों, खेती के समय, साइलेज के रूप में मूल्य संवर्धन, पशुओं को खिलाने का तरीका आदि के बारे में महिलाएं जागरूक हैं। ऽ पशुओं में खनिज की कमी पर महिलाओं के ज्ञान के आधार पर पशुओं को नियमित रूप से खनिज मिश्रित दाना देना। ऽ जानवरों के शरीर के वजन के अनुसार पशुओं की खाद्य आवश्यकताओं का आकलन करना। ऽ जानवरों को चारा खिलाने हेतु नियमित रूप से नांद का प्रयोग करना ताकि चारा की बरबादी कम से कम हो। ऽ जानवरों के रहने के स्थान को स्वच्छ एवं जलवायु स्मार्ट बनाये रखना। ऽ स्वच्छ वातावरण में दूध निकालने के अभ्यासों को अपनाना। ऽ ईंधन हेतु बायोगैस के रूप में उपयोग के लिए गा |
वर्ष 2016, में जब यह प्रारम्भ किया गया था, उस समय केवल 40 महिलाएं शामिल थीं। 2020 के अन्त तक, बाएफ द्वारा संचालित पशु प्रजनन कार्यक्रम में चलाये गये दक्षता कार्यक्रम से सीखते हुए 100 से अधिक महिलाओं ने समुचित प्रबन्ध अभ्यासों को अपनाया।
लगभग 100 महिलाओं को पशुपालन में सर्वोत्तम अभ्यासों को अपनाने हेतु ‘‘महिला पशुपालक’’ के तौर पर प्रशिक्षित किया गया। महिलाएं वर्मी कम्पोस्ट बनाने एवं उपयोग करने, बायोगैस का उपयोग करने, परम्परागत तरीके से पशुओं का प्राथमिक उपचार करने, चारा का मूल्य संवर्धन, स्वच्छ वातावरण में दूध निकालना, पशु चारा प्रबन्धन, जलवायु स्मार्ट पशुगृह, पशु प्रजनन सेवाएं प्रदान करना आदि अभ्यासों को कर रही हैं। 80 प्रतिशत से अधिक परिवार पशुपालन में लगने वाली लागत में कमी ला रहे है। तीन स्वयं सहायता समूहों के साथ-साथ व्यक्तिगत स्तर पर भी महिलाएं वर्मी कम्पोस्ट बनाने के कार्य में संलग्न हैं, जिससे उनकी आजीविका में सुधार आया है, आय में वृ़िद्ध हुई है।
किसानों की आजीविका पर प्रभाव
एफपीओ ने बहुत से किसानों के जीवन विभिन्न रूपों में सकारात्मक प्रभाव डाला है। तीन वर्षों में, प्राप्त उपरोक्त आँकड़े यह बताते हैं कि किसानों ने किस तरह से सेवाओं एवं लाभों को प्राप्त किया है।
* 55 किसानों ने फार्मर प्रोड्यूसर कम्पनी को दुध की आपूर्ति की और दो वर्षों में उनकी आय में 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
* 137 से अधिक किसानों ने चारा पर लगने वाली लागत को कम किया।
* दो वर्षों में 12 व्यक्तिगत किसानों और 4 स्वयं सहायता समूहों ने अपनी आय में 20 प्रतिशत तक की वृद्धि की।
* 179 किसान उपभोक्ता थे।
* आपूर्तिकर्ताओं ने अपनी आय में कम से कम 10 प्रतिशत तक की वृद्धि सुनिश्चित की।
* कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम के माध्यम से 194 किसान लाभान्वित हुए। साथ ही विभिन्न अभ्यासों को अपनाकर पशु प्रबन्धन में लगने वाली लागत में 15 प्रतिशत तक की बचत की।
* एफपीओ कोयला बनाने वाली कम्पनियों को कपास के अपशिष्ट भी आपूर्ति करता है जिससे 50 किसानों की आय में 5-7 प्रतिशत तक वृद्धि के साथ वे लाभान्वित हुए हैं।
* एफपीओ विकासखण्ड के 20 से अधिक अंशधारकों को दुध की आपूर्ति करता है। इस प्रकार प्रत्येक परिवार दुसरे से दूध खरीदने पर होने वाले व्यय की तुलना में यहां से दूध खरीदकर प्रतिदिन 10 प्रतिशत लागत बचाता है।
विपणन
श्री कामधेनु फार्मर प्रोड्यूसर कम्पनी लिमिटेड ने ‘‘श्री कामधेनु’’ नाम से अपना स्वयं का ब्राण्ड स्थापित किया है। उपभोक्ताओं को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए, गुणवत्तापूर्ण उत्पाद एवं पैकेजिंग के साथ-साथ अपना स्वयं का ब्राण्ड भी बनाना आवश्यक था। अब श्री कामधेनु फार्मर प्रोड्यूसर कम्पनी लिमिटेड, कटोल शहर में भी अपनी पहुंच का विस्तार कर रही है। आने वाले वर्षों में पूरे जिले में अपनी सेवाओं एवं सुविधाओं का प्रसार करना इसके आगामी नियोजन में है। उपभोक्तओं से प्राप्त होने वाली प्रतिक्रियाएं सकारात्मक हैं। श्री कामधेनु फार्मर प्रोड्यूसर कम्पनी बहुत से मूल्य सवंर्धित उत्पादों की बिक्री कर रहा है (तालिका सं0 2 देखें)।
तालिका 2: फार्मर प्रोड्यूसर कम्पनी द्वारा बिक्रीत दुग्ध उत्पाद
| क्रमांक | उत्पाद | उत्पादन (किग्रा0 में) | दर (प्रतिकिग्रा0) | धनराशि (रू0 में) |
| 1 | खोवा | 2464.89 | 291.59 | 7,18,729.90 |
| 2 | पनीर | 5338 | 267.91 | 14,30,100.26 |
| 3 | पेड़ा | 1328.7 | 3,62,473.76 | 272.80 |
| 4 | लोनी | 37.7 | ||
| 5 | बासुन्दी | 133 | ||
| 6 | टप | 109.33 | ||
| 7 | दही | 64.79 | ||
| 8 | क्रीम | 815.83 | ||
| 9 | रबड़ी | 87 | ||
| 10 | 6352 | |||
| 11 | घर-घर बेचा गया दूध | 32203 |
चुनौतियां एवं आगे की योजना
इसमें चुनौतियां भी हैं। श्री कामधेनु फार्मर प्रोड्यूसर कम्पनी लिमिटेड के सामने आने वाली प्रमुख चुनौती के रूप में सेवाओं एवं पहुंच का विस्तार तथा वित्तीय एवं विपणन सम्बन्धी सीमाएं हैं। तथापि, विभिन्न प्रदर्शिनियों एवं कार्यशालाओं में सहभागिता के माध्यम से इस चुनौती से निपटने हेतु निरन्तर प्रयास किये जा रहे हैं। सबसे बड़ी संतुष्टि तो यह है कि किसान डेयरी व्यवसाय की संभावनाओं के बारे में पूर्णतया जागरूक हैं। वे सक्रिय सहभागिता कर रहे हैं और निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल हो रहे हैं।
एफपीओ इसे और विस्तारित करने की योजना व संभावनाएं भी तलाश रहा है। इस हेतु एक विस्तार रणनीति तैयार की जा रही है, जिसके अन्तर्गत विदर्भ के आस-पास के जिलों में व्यवसाय का विस्तार, किसानों को प्रसार सेवाएं उपलब्ध कराना, बडे़ शहरों में शीघ्रातिशीघ्र स्व-आउटलेटों को खोलना, सरकारी योजनाओं जैसे- प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिकीकरण योजना (पीएमएफएमई), एसएमएआरटी, जलवायु अनुकूलित कृषि परियोजना के अन्तर्गत विशेष रूप से महाराष्ट््र के लिए चलाई जा रही महाराष्ट््र सरकार व विश्व बैंक द्वारा चलायी जा रही योजना नानाजी देशमुख कृषि संजीवनी प्रकल्प (पीओसीआरए) एवं अन्य दूसरी योजनाओं का लाभ लेना शामिल है।
अमर रायपुरे
जिला कार्यक्रम अधिकारी, बाएफ
द्वारा: अमोल पेठे मकान, उत्तम सिटी,
वार्ड नं0 1, हिंगनघाट मार्ग,
निकट ग्राम पंचायत इंजापुर
ग्राम- इंजापुर, पोस्ट- बोरगाँव (मेघे)
जिला- वर्धा – 442 001, महाराष्ट््र (भारत)
Source: Water Management, LEISA INDIA, Vol. 25, No.4, December. 2023



