सिंचाई के लिए सौर ऊर्जा से जुड़ाव

Updated on December 3, 2024

एक क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधनों को छोड़ते हुए सौर ऊर्जा शक्ति जैसे ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों के उपयोग की तरफ प्रवृत्त होने से न केवल आजीविका बढ़ती है, वरन् जीवाश्म इंधनों पर लगने वाली लागत में भी कमी आती है। सौर ऊर्जा का उपयोग करने से पर्यावरण को भी बहुत अधिक लाभ पहुँचता है। लद्दाख की कहानी इसी बात को पुष्ट व प्रदर्शित करती है।


लद्दाख विश्व के सर्वाधिक ठण्डक वाले तथा अत्यधिक ऊँचाई वाले आवासीय क्षेत्रों में से एक है। यह क्षेत्र सूर्य की रोशनी जैसे प्राकृतिक संसाधनों की अधिकता के मामले में धन्य है। इस क्षेत्र में एक वर्ष में 320 से अधिक दिनों तक सूर्य की स्पष्ट धूप मिलती है और औसतन 2149 वॉट/एम2 के औसतन वार्षिक विकिरण के साथ यहाँ का तापमान 27 डिग्री सेल्सियस से अधिक शायद ही कभी हुआ हो। ये सभी स्थितियां मिलकर सौर ऊर्जा उत्पादन हेतु, विशेषकर फोटोवोटालिक व थर्मल पॉवर के सन्दर्भ में इस क्षेत्र को अधिक आदर्श बनाती हैं।

लद्दाख में अवस्थित लाट्टू गाँव भारतीय सीमा का सबसे अन्तिम गाँव है। यह गाँव 1967 में शरणार्थियों द्वारा बसाया गया था। गाँव के पास खेती योग्य भूमि पर्याप्त मात्रा में थी, लेकिन सिंचाई हेतु पानी आने का मुख्य स्रोत पाकिस्तान में है। यह क्षेत्र शिंगा नाला नदी से लगभग 700 फीट ऊपर स्थित है। इस क्षेत्र के लिए पानी का एकमात्र स्रोत झरना है, जिससे बिजली अथवा डीजल से चलने वाले पम्पसेटों के माध्यम से पानी ऊपर खींचा जाता है। झरने से पानी के अत्यधिक उपयोग से पर्यावरणीय प्रदूषण एवं जलवायु परिवर्तन की गति बढ़ रही है। परिणामतः पानी की कमी हो गयी है। इसके साथ ही, बिजली और डीजल आधारित पम्पों का उपयोग कर नदी से पानी ऊपर खींचने की प्रक्रिया में बिजली का बिल भी अत्यधिक बढ़ा है। ऐसी पृष्ठभूमि में, लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद कारगिल एवं कारगिल नवीकरणीय ऊर्जा विकास प्राधिकरण ने एक साथ मिलकर सौर ऊर्जा आधारित सबमर्सिबल जल पम्प का उपयोग कर जल ऊपर उठाने की प्रणाली पर एक मॉडल परियोजना प्रारम्भ की।

पहल
परियोजना क्षेत्र में, लगभग 23 एकड़ परिक्षेत्र में फैले खुबानी के पेड़ों, अल्फा-अल्फा, गृहवाटिका आदि को सूखा का सामना करना पड़ रहा है। लगभग 15 एकड़ खेती योग्य जमीनों को परती छोड़ दिया गया है। सोलर वाटर पम्प का उपयोग कर, बिना किसी अतिरिक्त लागत के और पर्यावरण को नुकसान पहुँचाये बगैर ही सिंचाई के लिए पानी ऊपर उठाया जा सकता है और इस परती पड़ी भूमि पर खेती की जा सकती है।

इस सोच को ध्यान में रखते हुए, खेती की सिंचाई में सहायता हेतु एक सोलर वाटर लिफ्टिंग प्रणाली को लगाया गया। यह पम्पिंग प्रणाली पूरी तरह से सौर ऊर्जा आधारित 41 हार्सपावर की क्षमता वाला सबमर्सिबल पम्प है। पम्पिंग प्रणाली को चलाने के लिए 50केडब्ल्यूपी क्षमता का एक सोलर पम्प शामिल है। नदी के तट पर 3.35 मी0 गोलाई, 2.10 मी0 चौड़ाई और 3.65 मी0 गहराई का एक जैक वेल बनाकर उसमें पम्प को रखा गया है और 140 मिमी0 व्यास की चौड़ाई वाले डिलेवरी पाइप के माध्यम से पानी ऊपर उठाया जाता है। पाइप की चौड़ाई लगभग 360 मीटर है। प्रणाली में लगे हेड रेंज की चौड़ाई 130-160 मीटर है और 6 घण्टे में 1 लाख लीटर पानी लिफ्ट करने में मदद मिलेगी।

यह सोलर वाटर पम्प वर्ष 2019 में लगाया गया और अभी तक कार्य कर रहा है। इस प्रणाली के सुचारू रूप से कार्य करने के कारण इस क्षेत्र के लोग अप्रैल से लेकर नवम्बर तक गर्म महीनों में काफी खुश रहते हैं। किसान अपने उपयोग और बाजार में बेचने के लिए फल एवं सब्ज़ियां उगाते हैं और अपनी आमदनी में वृद्धि कर रहे हैं।
परती पड़ी भूमि एवं सूखा से प्रभावित खेती को सिंचाई की सुविधा प्रदान करने के अलावा, सोलर वाटर पम्प से रोजगार सृजन भी हो रहा है। गाँव से दो व्यक्तियों का चयन कर उन्हें पम्पों के रख-रखाव एवं प्रबन्धन पर प्रशिक्षित किया गया। इन दोनों व्यक्तियों को पम्प की देख-भाल व प्रबन्धन हेतु मासिक तौर पर मानदेय दिया जाता है। इसके अतिरिक्त, कम्पनी न केवल प्रत्येक वर्ष अपनी टीम को पम्पों की वार्षिक जाँच करने हेतु भेजती है, अपितु पम्प संचालन में कोई समस्या आ जाने पर उसके समाधान हेतु सेवाएं भी उपलब्ध कराती है। इसके अलावा, कम्पनी भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर काम आने हेतु पम्प के कुछ स्पेयर पार्ट्स को निःशुल्क उपलब्ध भी कराती है। वर्तमान समय में पम्प सुचारू रूप से क्रियाशील हैं।

चूँकि यहाँ पर शीतकाल में कोई कृषिगत उत्पादन नहीं होता है। इसलिए सर्दियों के दौरान पानी ऊपर उठाने की कोई आवश्यकता नहीं होती है। लेकिन सरकार ने, सर्दियों में सोलर पम्प को बेकार छोड़ने के बजाय, ‘‘जल-जीवन-अभियान’’ के दृष्टिकोण के तहत् ‘‘हर घर जल’’ के लक्ष्य को प्राप्त करने की योजना बनायी। आगे, इसका तकनीकी और आर्थिक विश्लेषण किया गया और यह पाया गया कि सौर ऊर्जा का उपयोग ऊर्जा के अन्य स्रोतों की अपेक्षा अधिक संस्ता है। सौर ऊर्जा के उपयोग से कार्बन उत्सर्जन कम करने में भी मदद मिलेगी।

इस हस्तक्षेप की सफलता के बाद, लद्दाख के ग्रामीण क्षेत्रों जैसे- डार्गों संतकचन, अदुलंगुंड और छानीगुंड में इसी प्रकार की बहुत सी परियोजनाएं प्रारम्भ की गयी है। सोलर वाटर पम्पों के अलावा, इस क्षेत्र में सौर ऊर्जा आधारित अन्य उत्पाद जैसे- सोलर वाटर हीटर, सोलर ग्रीन हाउस, सोलर पैकहाउस, सोलर स्ट्रीट लाइटिंग आदि भी लोगों के ध्यानाकर्षण का केन्द्र बन रहे हैं। लद्दाख की निरन्तर समृद्धि नवीकरणीय ऊर्जा जैस- सोलर पावर के उपयोग पर निर्भर करेगी, जिससे आय और रोजगार सृजन के विकल्पों में वृद्धि होगी, पर्यावरणीय लाभ होगा और लोगों का जीवन स्तर बेहतर होगा।

सन्दर्भ
* एस0के0 लोहन एवं एस0 शर्मा, भारत के जम्मू एवं कश्मीर राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की वर्तमान स्थिति, 2012, रिन्यूएबल एण्ड सस्टेनेबल इनर्जी रिव्यू, 16 (5) 3251-3258
* https://doi.org/10.1016/j.rser.2012.02. 011
* https://pmkusum.mnre.gov.in/pdf/Community%20
* Irri%20KREDA.pdf


बिलकिस फातिमा
डॉक्टोरल रिसर्च स्कॉलर
अर्थशास्त्र अध्ययन विभाग
पंजाब केन्द्रीय विश्वविद्यालय, भटिण्डा-151 401
ई-मेल:  bilques.fatima93@gmail.com


Source: Water Management, LEISA INDIA, Vol. 25, No.2, June. 2023

Recent Posts

लाभकारी कीटों पर चर्चा के माध्यम से परागण संरक्षण में युवाआंे की भागीदारी

लाभकारी कीटों पर चर्चा के माध्यम से परागण संरक्षण में युवाआंे की भागीदारी

परागणकर्ताआंे की संख्या में तेजी से आ रही कमी चिन्ताजनक है। इनकी कमी से पारिस्थितिकी तंत्र नष्ट हो जायेगा तथा खाद्य...