स्थाई विकास के लिए एक साथ आ रहे हैं

Updated on September 4, 2024

नीलगिरी जीवमण्डल सुरक्षित क्षेत्र में रहने वाले देशज समुदायों ने अपनी आजीविका को सुरक्षित करने की दृष्टि से अपने-आपको एक किसान उत्पादक कम्पनी के रूप में संगठित किया है। कम्पनी में दिनांेदिन किसानों की बढ़ती सदस्य संख्या और व्यापार का टर्नओवर इस मॉडल की सफलता को दर्शाता है और देशज समुदायों के लिए स्थाई और उचित आजीविका विकल्पों को प्रदान करता है।


नीलगिरी जीवमण्डल में रहने वाले स्थानीय समुदाय काफी, काली मिर्च, सिल्क कपास, मोटे अनाज, दलहन, अनाज, मसाले और फलों की खेती करते हैं। इसके साथ ही वे अपने आस-पास स्थित जंगलों से शहद, आंवला, शिकाकाई, रीठा, जामुन, खजूर की पत्तियां भी एकत्र करते हैं। स्थानीय समुदाय अपने वनोत्पादों को बेचने के दौरान अनुचित मूल्य निर्धारण, बाजार के उतार-चढ़ाव और बिचौलियों के शोषण जैसे मुद्दों से जूझ रहे थे। इन मुद्दों से निपटने हेतु अधिमलाई पझनगुडियईनार प्रोड्यूसर कम्पनी लिमिटेड का उदय हुआ, जिसका मुख्य उद्देश्य एक ऐसी व्यवस्था स्थापित करना है, जो उनके उत्पादों के लिए उचित मूल्य सुनिश्चित करती है, बाजार में स्थिरता प्रदान करती है और मूल्यों के उतार-चढ़ाव सम्बन्धी नाजुकता को कम करती है।

शुरूआत
अधिमलाई की स्थापना के पीछे प्रेरणा के तौर पर काम करने वाली संस्था कीस्टोन फाउण्डेशन ने गांव स्तर पर संसाधन केन्द्रों की स्थापना के माध्यम से समुदायों द्वारा एकत्र उत्पादों के मूल्य संवर्धन की प्रक्रिया प्रारम्भ की। वर्ष 2004-05 में पूरे नीलगिरी जीवमण्डल क्षेत्र में क्षेत्रीय संसाधन केन्द्रों की स्थापना की गयी। यह मुख्य गांव में स्थापित था और गांव के साथ जुड़े सभी टोलों को सेवाएं प्रदान करता था।
समय के साथ, वनोत्पादों और खेत के उत्पादों का उत्पादन एवं मूल्य संवर्धन इन संसाधन केन्द्रों द्वारा की जाने वाली एक महत्वपूर्ण गतिविधि थी। कीस्टोन के आजीविका सम्बन्धी हस्तक्षेपों के माध्यम से प्रोत्साहित की जाने वाली गतिविधियों से जैविक और स्थाई रूप से उपजाये गये उत्पाद प्राप्त हुए। खुले बाजारों में इन्हें बेचने के अतिरिक्त, उत्पादों का मूल्य संवर्धन करना और स्थानीय स्तर पर इनकी बिक्री करने पर भी जोर दिया गया। जिन महत्वपूर्ण पहलुओं पर जोर दिया गया, उनमें से एक इन केन्द्रों पर समुदाय की सदस्यता होना था। इससे कई परिवारों से उत्पादों को एकत्र करना आसान हुआ। कुछ चुने हुए लोगों, विशेषकर महिलाओं को मूल्य संवर्धन हेतु प्रशिक्षित किया गया।

समय के साथ, केन्द्रों की भूमिका विविध होती गयी और उन्होंने मुख्य रूप से एक उत्पादन केन्द्र के तौर पर कार्य करना प्रारम्भ कर दिया। उनके द्वारा दी जाने वाली अन्य सेवाओं में,

ऽ जंगल, जमीन, वन्यजीवन और जल पर ज्ञान और जानकारी हेतु एक आधार संसाधन केन्द्र।
ऽ अधिक से अधिक दक्षता और यथोचित तकनीकों को ग्रहण करने हेतु एक स्थान।
ऽ बच्चों हेतु पर्यावरण शिक्षा और कार्यक्रमों के लिए एक स्थान।
ऽ महिलाओं एवं बच्चों हेतु स्वास्थ्य शिक्षा के लिए एक केन्द्र।
ऽ आदिवासियों एवं जंगलों से सम्बन्धित वर्तमान कानून एवं अधिकारों पर एक आधार ज्ञान केन्द्र।

वर्ष 2013 तक, ये सभी इकाईंया एक उत्पादक कम्पनी के तौर पर संगठित एवं पंजीकृत हो गयीं। उत्पादन केन्द्रों का पंजीकरण अधिमलाई पझानगुडियाईनार प्रोड्यूसर कम्पनी लिमिटेड के अन्तर्गत हुआ।

147 गांवों में विस्तारित अधिमलाई पझानगुडियाईनार प्रोड्यूसर कम्पनी लिमिटेड का पूर्ण स्वामित्व स्वदेशी समुदायों के पास है और राष्ट््रीय स्तर पर इस तरह की यह पहली कम्पनी है। निर्माता समूह को भारतीय कम्पनीज अधिनियम 1956 के अन्तर्गत 3 अप्रैल, 2013 को अधिमलाई पझानगुडियाईनार प्रोड्यूसर कम्पनी लिमिटेड नाम से पंजीकृत किया गया। कीस्टोन ;ूूूण् ामलेजवदम.विनदकंजपवदण्वतहद्ध द्वारा पल्लवित व पोषित अधिमलाई पझानगुडियाईनार प्रोड्यूसर कम्पनी लिमिटेड को पारम्परिक जैविक खाद्य की खेती, हस्तशिल्पों, पशुपालन, वनोत्पादों की स्थाई फसल, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, मूल्य संवर्धन आदि गतिविधियों को प्रोत्साहन देकर स्वदेशी समुदायों की आजीविका को बढ़ाने के उद्देश्य से वर्ष 2013 में प्रारम्भ किया गया था। इससे मुख्य उद्देश्य समुदायों एवं स्थानीय स्थलाकृति की बेहतरी सुरक्षित होती है।

व्यापार प्रबन्धन अभ्यासों और हाशिये पर रहने वाले स्वदेशी समुदायों की अनूठी आवश्यकताओं के बीच खाई को भरने हेतु पुल के तौर पर कार्य करना अधीमलाई के विजन का मुख्य पहलू था।

बिचौलियों द्वारा शोषणकारी व्यापार प्रथाओं को खत्म करने के लक्ष्य के साथ स्थापित यह उद्यम गुणवत्ता, पर्यावरण-सम्मत एवं उचित मूल्य निर्धारण पर ध्यान केन्द्रित करता है। वर्तमान में अधीमलाई के 1809 शेयरधारक हैं जो सभी नीलगिरि जीवमण्डल संरक्षित क्षेत्र में रहने वाले स्वदेशी समुदायों के सदस्य हैं। विभिन्न क्षेत्रों में शेयरधारकों के वितरण को नीचे दी गयी तालिका में दर्शाया गया है-

फार्मर प्रोड्यूसर आर्गनाइजेशन के गठन में स्वदेशी समुदाय के सदस्यों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। समुदाय के सदस्यों द्वारा चुने गये निदेशक मण्डल के साथ लोकतान्त्रिक शासन संरचना ने यह सुनिश्चित किया कि फार्मर प्रोड्यूसर आर्गनाइजेशन की गतिविधियां समुदाय के हितों और जरूरतों के अनुरूप हों, जिससे समुदाय के अन्दर स्वामित्व व समावेशिता की भावना को बढ़ावा मिले।

मुख्य फायदे
स्थानीय समुदायों की सामाजिक और आर्थिक बेहतरी के लिए विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से अधीमलाई ने उल्लेखनीय योगदान दिया है। कुछ मुख्य फायदे निम्नवत् हैं-

अधीमलाई कुछ प्रमुख वनोत्पादों जैसे- शहद, मोम, शिकाकाई, आंवला, रीठा, जामुन, अंजीर एवं हरड़ के साथ कॉफी, सिल्क कॉटन, मोटे अनाज एवं काली मिर्च जैसे कृृषिगत उत्पादों की खरीद करता है। संगठन यह सुनिश्चित करता है कि स्थानीय व्यापारियों की तुलना में समुदाय के सदस्यों को अपने उत्पादों का उच्चतम मूल्य मिले। उदाहरण के लिए, अधीमलाई समुदाय के लोगों को रू0 190.00 प्रति किग्रा0 कॉफी की दर से मूल्य भुगतान करता है, जबकि स्थानीय व्यापारी रू0 100.00-रू0 110.00 प्रति किग्रा की दर से ही भुगतान करते हैं।

निश्चित माप-तौल को सुनिश्चित करने और घटतौली तथा विसंगतियों को दूर करने की दृष्टि से अधीमलाई इलेक्ट््रानिक तौल मशीन का उपयोग करती है। इस अभ्यास से समुदाय के सदस्यों को आधुनिक प्रणालियों के साथ ताल-मेल स्थापित करने और व्यापारियों के साथ डीलिंग करने में सहायता मिली है।

यह स्थानीय बाजारों में नहीं बिक पाने वाले वनोत्पादों जैसे शिकाकाई, मोम, अंजीर, हरड़, रीठा आदि के लिए बाजार भी उपलब्ध कराता है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि कुछ निश्चित उत्पादों जैसे शहद के लिए अधीमलाई बाजार से दुगुना मूल्य प्रदान करता है। शहद एकत्र करने में होने वाले जोखिमों को ध्यान में रखते हुए अधीमलाई, शहद इकट्ठा करने वाले लोगों के लिए रू0 1,00,000.00 तक का एक्सीडेण्टल बीमा भी प्रदान करता है। इस बीमा से सदस्यों एवं उनके परिवारों का बहुत बड़ा सहयोग होता है।

वनोत्पादों की स्थाई फसल तकनीकों पर समुदाय के सदस्यों को प्रशिक्षण देने हेतु अधीमलाई ने कीस्टोन फाउण्डेशन के साथ समन्वय स्थापित किया है। स्थानीय पारिस्थितिकी प्रणाली के प्रबन्धन एवं विकास के लिए यह एक उल्लेखनीय पहल है।

अधीमलाई किसानों को जैविक कृषि अभ्यासों को अपनाने हेतु निरन्तर प्रोत्साहित करता रहता है। यह सहभागी निश्चित प्रणाली के भाग के तौर पर किसानों को समूह बनाने एवं स्थाई एवं जैविक कृषि अभ्यासों को अपनाने में मदद करता है।

चुनौतियां एवं जीत
अपने शुरूआती दिनांे में अधीमलाई ने बहुत सी चुनौतियों का सामना किया। एक व्यवहार्य बाजार की स्थापना, खराब होने वाली वस्तुओं की पर्याप्त आपूर्ति का प्रबन्धन करना, मूल्य निर्धारण की अस्थिरता से निपटना एवं एक सशक्त ब्राण्ड पहचान बनाना कठिन बाधाएं थीं। वर्तमान में सम्पर्क हेतु अपर्याप्त बुनियादी ढांचों को देखते हुए गांवों तक सीमित पहुंच एक बड़ी चुनौती है।

अधीमलाई के संचालन का एक महत्वपूर्ण पहलू इसकी खरीद रणनीति है, जो विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह उत्पादकों पर केन्द्रित है। इन समुदायों के साथ सीधा और निष्पक्ष सम्बन्ध, स्थानीय बाजार मूल्यों से अधिक बढ़े हुए मूल्यों में दिखता है, जो सामाजिक समानता और गुणवत्ता के प्रति अधीमलाई की प्रतिबद्धता पर जोर देता है।

सहभागी गारण्टी प्रणाली के अन्तर्गत स्थाईत्व एवं जैविक अभ्यासों पर अधीमलाई का जोर इसकी प्रमाणीकरण में स्पष्ट है। संगठन रोपाई से लेकर कटाई तक के प्रत्येक चरण में जैविक अखण्डता और स्थाईत्व के अपने मूल मूल्यों को गहनता से शामिल करते हुए उत्पादन के हर चरण को सावधानीपूर्वक दस्तावेजित करती है।

खरीद, उत्पादन एवं पैकिंग चरणों के दौरान कड़ी गुणवत्ता जांच अधीमलाई के संचालन का अभिन्न अंग है। कठोर गुणवत्ता नियंत्रण की यह प्रतिबद्धता सुनिश्चित करती है कि संसाधन से निकलने वाला प्रत्येक उत्पाद उच्चतम मानकों को पूरा करता है, उपभोक्ताओं की सुरक्षा करता है और अधीमलाई के लक्ष्य की अखण्डता बनाये रखता है।

प्रभाव
समय के साथ अधीमलाई का प्रभाव धीरे-धीर बढ़ता जा रहा है। 15 सदस्यों के साथ शुरू की गयी इस कम्पनी के वर्तमान में 1809 शेयरधारक हैं। यह विकास नीलगिरी जीव मण्डल क्षेत्र के स्वदेशी समुदायों के लिए स्थाई और निष्पक्ष आजीविका प्रदान करने के मॉडल की सफलता को प्रदर्शित करता है।

अधीमलाई ने पूरे देश में थोक एवं खुदरा दोनों प्रकार के व्यापारियों को अपने उत्पादों का सफलतापूर्वक बिक्री किया है, जिससे पर्याप्त वृद्धि हुई है। वर्ष 2023 में शेयरधारकों की संख्या 1609 से बढ़कर 1809 हो गयी, जो इसके तीव्र विकास को दर्शाता है। ध्यान देने योग्य है कि कम्पनी ने पिछले वित्तीय वर्ष में 1.2 करोड़ का उल्लेखनीय कारोबार किया है। प्रत्येक वर्ष, कम्पनी द्वारा प्राप्त लाभांशों को आदिवासी उत्पादकों में वितरित किया जा रहा है।

वित्तीय वर्ष 2022-23 में अधीमलाई ने लगभग 135 गांवों के 2200 आदिवासी परिवारों तक पहंुच बनाकर महिलाओं के 5115 कार्य दिवसों का सृजन किया। इसी वर्ष, समुदाय के जिन सदस्यों ने अपने उत्पादों की आपूर्ति कम्पनी को की थी, उन्हें बोनस के रूप में रू0 2.25 लाख रूपये वितरित किये गये।

वर्ष 2021 में यूएनडीपी से प्रतिष्ठित इक्वेटर पुरस्कार मिल जाने के कारण सामुदायिक उत्थान के लिए संगठन की प्रतिबद्धता और भी बढ़ गयी है। अधीमलाई का भविष्य स्थानीय समुदायों के भरण-पोषण से सघन रूप से जुड़ा हुआ है। संगठन सामुदायिक उत्थान के लिए समर्पित समान विचारधारा वाले संगठनों के साथ भागीदारी जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। जैविक और टिकाउ खेती पद्धतियों को अपनाने पर जोर दिया जायेगा और कम्पनी का लक्ष्य स्वायत्ता की भावना को बढ़ावा देते हुए सामुदायिक क्षमताओं को बढ़ाना है।


जस्टिन पॉल्स
अधीमलाई पझानगुडियइनार प्रोड्यूसर कम्पनी लिमिटेड
41/111ई, गू्रव्स हिल रोड,
कोटागिरी – 643217
ई-मेल: ceo@aadhimalai.in


Source: Farmer Producer Organisation, Vol.25, No.4, December 2023

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