बढ़ते वृक्ष, सुदृढ़ आजीविका, पर्यावरण सुरक्षा

Updated on December 4, 2020

ग्रो-ट््रीज डॉट कॉम एक सामाजिक उद्योग है, जो विश्व स्तर पर लोगों और कम्पनियों को पौध लगाने में सक्षम बनाने हेतु कम लागत सेवाएं उपलब्ध कराती है। अपनी वेब सक्षम सेवाओं के माध्यम से, यह संगठन प्रत्येक व्यक्ति को पर्यावरण सुुरक्षा में अपना योगदान देने का एक अवसर प्रदान कर रहा है।


भारत का ग्रामीण समुदाय लम्बे समय से वंचनाओं में ही जीवित है। उनके पास जीवित रहने के लिए न केवल मूलभूत सुविधाओं की कमी है, वरन् संसाधनों जैसे- जल, खाद्य एवं नियमित आमदनी पर पहुंच न होने के कारण इन चुनौतियों को पूरा करना भी संभव नहीं है। अधिकांश समुदाय न्यून मृदा उर्वरता, रोजगार के अवसरों की कमी एवं प्रदूषित जलस्रोतों वाले क्षेत्रों में रहते हैं।

ग्रो-ट््रीज डॉट कॉम एक सामाजिक उद्यम है, जो ग्रामीण एवं आदिवासी समुदायों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को उन्नत बनाने के लिए वर्ष 2010 से पूरे भारत में पौधरोपण कार्य को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य के साथ काम कर रही है। इन समुदायों के सदस्यों को जीवन के मूलभूत से जोड़ना इस उद्यम का लक्ष्य है।

पिछले 10 वर्षों में, इस संगठन का विस्तार पूरे भारत के 20 राज्यों- उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट््र, झारखण्ड, मध्यप्रदेश, कर्नाटक, आन्ध्रप्रदेश, राजस्थान, बिहार, अरूणाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, तमिलनाडु, सिक्किम, तेलंगाना, उत्तराखण्ड, दिल्ली, पुडुचेरी एवं पंजाब में है। वैश्विक स्तर पर इसने हाल ही में केन्या के चेरंगानी पहाड़ियों में वनीकरण परियोजना को लिया है।

प्रक्रिया
ग्रो-ट््रीज, अपने परियोजना समन्वयकों, नियोजन सहभागियों एवं पर्यावरण शोधार्थियों के सहयोग से वनीकरण के लिए सामुदायिक जमीनों का चयन किया एवं पौधरोपण की गतिविधियों को प्रारम्भ किया। रिहायशी क्षेत्रों में लोगों को अधिकतम लाभ प्रदान करना सुनिश्चित करने के लिए केवल सार्वजनिक भूमि पर वृक्षारोपण किया गया।

पौधरोपण प्रक्रिया में ग्रामीण समुदायों को शामिल करने हेतु जागरूकता अभियान चलाया गया। वृक्षों से होने वाले फायदों के बारे में पंचायत एवं समुदाय के सदस्यों को शिक्षित करने हेतु ग्राम स्तर पर बैठकों का आयोजन किया गया। बैठक करते समय पौधरोपण प्रक्रिया को प्रारम्भ करने और उसे निरन्तर बनाये रखने के लिए महत्वपूर्ण उपायों को भी ध्यान में रखा गया। इन बैठकों के दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि समुदाय के लोगों को वृक्षों के मूल्यों के बारे में अवश्य बताया जाये। समुदाय के लोगों को वृक्षों के मूल्यों के बारे में संवेदित किया गया जिससे वे भूमि का अत्यधिक शोषण करने अथवा चराई के उद्देश्यों से इसका उपयोग करने से बचें।

पिछली आवश्यकताआंे के आधार पर, लम्बे शोध तथा विशेषज्ञों एवं समुदाय के लोगों के साथ विचार-विमर्श करने के बाद ही पौधरोपण हेतुु वृक्ष की प्रजातियों का चयन किया गया। स्थानीय जैव विविधता को संरक्षित करने हेतु प्रायः पौराणिक, औषधीय के साथ-साथ स्थानीय ग्रामीण समुदायों के आर्थिक मूल्य के पौध प्रजातियों का चयन किया गया। क्षेत्र की मृदा की विशेषताओं, वर्षा पद्धति तथा ग्रामीण समुदायों एवं वन्यजीवों के लिए आर्थिक, औषधीय एवं सामाजिक आवश्यकताओं के लिए उपयुक्त वृक्ष प्रजातियों की खोज कर स्थानीय नर्सरियों में उनकी नर्सरी तैयार की गयी। उदाहरण के लिए, बंगाल की खाड़ी से प्रायः टकराने वाली साइक्लोन की घटनाओं को देखते हुए आपदा प्रबन्धन के उपायों के तौर पर सुन्दरबन राष्ट््रीय पार्क के चारों तरफ सदाबहार के पौधे लगाये गये हैं। हाल के अध्ययनों में इस बात को भी उल्लिखित किया गया है कि सुन्दरबन राष्ट््रीय पार्क के चारों तरफ घने पेड़ांे की छाया के कारण, कोलकाता में प्राकृतिक आपदाओं के कारण बड़े पैमाने पर होने वाले नुकसानों से बचाया गया है।

  बाक्स 1: श्रीमती देवी की कहानी

बिल्लूपुरम के इरूला आदिवासी समुदाय से ताल्लुक रखने वाली 35 वर्षीय श्रीमती देवी के जीवन में इस परियोजना के कारण उल्लेखनीय परिवर्तन आये हैं। इनके परिवार में इनके 3 लड़के हैं, जिनकी देख-भाल इनके जिम्मे है। पहले, एक दैनिक भोगी मजदूर के रूप में 13 घण्टों तक काम करने के बाद इन्हें अपने परिवार की देख-भाल करने के लिए समय ही नहीं मिलता था और न ही ये अपने बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा या कल्याण के लिए कर या सोच पाती थीं।

वृक्षारोपण परियोजना के लिए एक नर्सरी कार्यकर्ता के रूप में संलग्न होने और आय अर्जन के पश्चात् श्रीमती देवी ने एक संगठनात्मक वातावरण में काम करने के लिए अपने-आप में गर्व महसूस किया और अ बवे अपने परिवार व बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य एवं बेहतर जीवन देने हेतु योगदान करने में सक्षम हुई हैं। आज ये अपने समुदाय के अन्य लोगों को भी जोड़ने के लिए भी कार्य करती हैं।

 

 

भारत के 20 राज्यों में 4.5 लाख से अधिक पौधों का रोपण कर विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर एक उपहार प्रदान किया। इससे ग्रामीण समुदायों के लिए रोजगार के लगभग 370000 कार्यदिवसों का सृजन हुआ।

अधिक से अधिक पौधे जीवित रह सकें, इसके लिए पौधों को पहले नर्सरी में तैयार किया गया और नर्सरी तैयार होने के बाद उसका पौधरोपण किया गया। पौधरोपण प्रक्रिया के दौरान ग्रामीण समुदाय नर्सरी में पौधों को उगाने, पौध लगाने वाले स्थलों तक पौधों की ढुलाई, पौध लगाने वाले स्थलों की सफाई एवं गढ्ढों की खुदाई, पौधरोपण एवं खेतों में पानी देना आदि विभिन्न गतिविधियों में संलग्न रहे। इससे आदिवासी-ग्रामीण समुदायों विशेषकर दैनिक मजदूरी पर काम करने वाली महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर भी उपलब्ध हुए।

समुदाय के साथ वृक्षों का जुड़ाव करने के बाद इन वृक्षों से होने वाले सभी प्रकार के सामाजिक-आर्थिक लाभों का एकमात्र प्राप्तकर्ता समुदाय ही है। समुदाय के लोग ही यह तय करते हैं कि वृक्षों से तोड़े गये फल एवं गैर इमारती वनोत्पादों को स्वयं उपभोग में लेने की आवश्यकता है अथवा बाजार में विपणन करना है। एक बार तैयार होने के बाद इन वृक्षों से प्राप्त गैर इमारती वनोत्पाद समुदाय के लिए जीवन भर आमदनी का एक स्थाई स्रोत होते हैं।

परिणाम एवं प्रभाव
इस संस्था ने भारत के 20 राज्यों में 4.5 लाख से अधिक पौधों का रोपण कर विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर एक उपहार प्रदान किया। इससे ग्रामीण समुदायों के लिए रोजगार के लगभग 370000 कार्यदिवसों का सृजन हुआ।

वृक्षारोपण प्रक्रिया के दौरान पैदा होने वाले ग्रामीण रोजगार तथा स्वयं के उपभोग एवं बिक्री दोनों के लिए उपयोग में आ सकने वाले उत्पादों के माध्यम से आमदनी के वैकल्पिक स्रोतों का सृजन हुआ है। वृक्षारोपण में शामिल समुदाय के सदस्य ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए कहा ‘‘यहां तक कि जब हमारे बच्चों ने हमें छोड़ दिया, उस समय ये वृक्ष ही मेरी और मेरी पत्नी की देख-भाल करने के लिए हमेशा हमारे साथ खड़े रहे हैं।’’

अपनी परियोजनाओं के माध्यम से ग्रो-ट््रीज ने राजस्थान और गुजरात के सूखाग्रस्त गांवों में जल की उपलब्धता सुनिश्चित करने में सफलता पाई है। उदाहरण के लिए, सरिस्का बाघ संरक्षण के निकट हमारे पौधरोपण के क्षेत्रों में, 400 फीट तक जलस्तर चला गया था, जो पौधरोपण के बाद 40 फीट तक आ गया है। इस क्षेत्र में पिछले 4 वर्षों में 400000 से अधिक वृक्षों का रोपण किया गया, जिससे न केवल वहां की ग्रामीण समुदायों को वरन् बाघ वन्य जीवों को भी लाभ हुआ है।

 

बाक्स 2: वृक्षों के साथ सत्कार

ग्रो-ट््रीज डॉट कॉम ट््रीज फीचर के साथ एक अनोखा सत्कार प्रदान करता है, जिसमें व्यक्ति ऑनलाइन पेड़ लगा सकते हैं और एक ई-सर्टिफिकेट के माध्यम से अपने प्रियजनों का सत्कार कर सकते हैं। अपने प्लाण्ट मन्थली ग्रीट एनीटाइम सब्सक्रिप्शन के द्वारा, ग्रो-ट््रीज डॉट कॉम भारत के प्रत्येक परिवार में वृक्षारोपण की आदत बनाने हेतु प्रयासरत है। इन ई-प्रमाण पत्रों को अपने परिवार एवं प्रियजनों को उनके जन्मदिन, किसी त्यौहार, शादी की वर्षगांठ आदि पर उपहारस्वरूप दिया जा सकता है। आप द्वारा लगाये गये प्रत्येक वृक्ष ग्रामीण समुदायों के लिए भरण-पोषण उपलब्ध कराते हैं। यह भारत को फिर से हरित बनाने हेतु प्रत्येक नागरिक को समान अवसर प्रदान करने का प्रयास कर रहा है।

 

 

लाखों लोगों के जीवन को सकारात्मक रूप से प्रभावित करने वाले, ग्रो-ट््रीज ने हमेशा अपनी परियोजनाओं के माध्यम से अधिकतम प्रभावों का सृजन करना सुनिश्चित किया है।

देश के अकल्पनीय भागों में वृक्षारोपण की पहल करके यह उन लोगों तक पहुंच गया हे, जिन्हें अक्सर व्यापक रूप से नजरअन्दाज कर दिया गया है। वे सम्बन्धित गतिविधियों के माध्यम से ग्रामीण समुदायों के लिए आयवृद्धि के रास्ते भी तलाश कर रहे हैं।

सुप्रिया पाटिल


सुप्रिया पाटिल
जी 3, शहरजादे भवन
कोलाबा, महाराष्ट््र, 400 005
ई-मेल: supriya.patil@grow-trees.com
वेबसाइट: www.Grow-Trees.com

Source: Nature plants- save the planet, LEISA India, Vol.21, No.4, December 2019

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