परिवार की गृह वाटिका

Updated on June 3, 2021

कर्नाटक में छोटे-मझोले खेतिहर परिवारों के बीच ‘‘कुटुम्ब काई थोट्स’’ अथवा परिवार की गृहवाटिका को सफलतापूर्वक प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि इन परिवारों को पोषण मिल सके और आमदनी का एक अतिरिक्त स्रोत भी प्राप्त हो सके।


हमारे भोजन की गुणवत्ता एवं सुरक्षा के विषय में जागरूकता बढ़ने के साथ-साथ, अपनी ताजगी, स्वच्छता एवं पोषण के कारण सब्ज़ियों की तरफ उपभोक्ताओं का अधिक ध्यानाकर्षण हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में लघु किसानों के अलावा, उद्यमियों एवं अन्य कई रूचि रखने वाले लोगों ने शौकिया सब्जी की खेती को अपनाया है। रसायनिक उर्वरक एवं कीटनाषक मुक्त तथा अधिक जैविक भोजन में रूचि रखने वाले लोगों ने स्वयं सब्जी उगाने को प्राथमिकता दी है और अपने घर के पिछवाड़े या छतों पर सब्ज़ियां उगाते हैं।

ग्रीन फाउण्डेषन एक स्वैच्छिक संगठन है, जो कर्नाटक के कनकपुरा तालुक में किसानों के साथ काम करती है। यहां के अधिकांष किसानों के पास एक या दो एकड़ खेती है और वे एकल खेती करते हैं। किसानों की निर्भरता वर्षा आधारित खेती पर है और उनकी वार्षिक आय औसतन रू0 30,000.00 है। जिस समय खेती में कोई काम नहीं रहता, उस समय यहां के किसान दूसरे राज्यों में खेतिहर अथवा अन्य दूसरे प्रकार की मजदूरी करने हेतु पलायन कर जाते हैं।

अपने संगठन के एक भाग के तौर पर, ग्रीन फाउण्डेषन ने लोगों के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी प्राप्त करने हेतु स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों के साथ मिलकर स्वास्थ्य षिविरों का आयोजन किया। इन कैम्पांे के दौरान कुपोषण से सम्बन्धित विभिन्न प्रकार के रोग/बीमारियों की पहचान हुई। यह भी निकलकर आया कि प्रत्येक परिवार प्रतिमाह सब्जी खरीदने पर लगभग रू0 400.00 व्यय करता है। कृषि की अनिष्चितता तथा इससे प्राप्त होने वाली न्यून आय पर विचार करते हुए, सब्ज़ियों के साथ अपने भोजन को पूर्णता प्रदान करना उनके लिए मुष्किल था और अपने परिवार की पोषण सुरक्षा के साथ समझौता करना उनकी मजबूरी थी।

परिस्थितियों के आधार पर, ग्रीन फाउण्डेषन ने लोगों को ‘‘कुटुम्बा काई थोट्स’’ अथवा गृहवाटिका स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करना और इस हेतु सहायता देना प्रारम्भ किया ताकि इन परिवारों को पोषण युक्त भोजन मिल सके और अतिरिक्त आमदनी का एक स्रोत उपलब्ध हो सके।

क्षमता वर्धन
संस्था के फील्ड कार्यकर्ताओं ने सबसे पहले उन परिवारों की पहचान की, जिनके घर के आगे या पीछे सब्ज़ियां उगाने के लिए जगह थी। तत्पष्चात् उन्होंने परिवार की महिलाओं को गृहवाटिका से होने वाले पोषण एवं आयजनक फायदों के बारे में बताते हुए गृहवाटिका लगाने के लिए प्रोत्साहित किया। सब्ज़ियों की खेती एवं बीज संरक्षण में महिलाओं ने हमेषा ही अग्रणी भूमिका निभाई है। घर के पीछे जैविक विधि से सब्ज़ियां उगाने हेतु महिलाआंे को प्रषिक्षित किया गया। देषी बीजों को प्रोत्साहित किया गया और किसानों को इन देषी प्रजाति के रोग एवं कीटरोधी बीजों की महत्ता के बारे में प्रषिक्षित किया गया।

कार्यकर्ताओं ने भूमि के आकार-प्रकार का आकलन किया और उसी के अनुरूप विभिन्न प्रकार की पद्धतियों जैसे- ऊँची भूमि पद्धति, परमाकल्चर एवं चेक बेसिन पद्धति से गृहवाटिका तैयार करने की संस्तुति दी। किसानों को 22 प्रकार के सब्ज़ियों के बीज दिये गये और उनसे कहा गया कि इसमें से वे अपनी गृहवाटिका के लिए बीज का चयन कर लें। चयन के दौरान, संस्था कार्यकर्ताओं द्वारा विषिष्ट संदर्भ के लिए उपयुक्तता, बीज को लगाने की पद्धति, पौधों द्वारा लिया जाने वाला स्थान, मृदा, कीटों का आक्रमण तथा समग्र रूप से उन बीजों के बारे में बताते हुए बीज चयन में सहयोग किया गया। कुछ किसानों ने अपनी गृहवाटिका में 10 विभिन्न प्रकार के सब्ज़ियों को उगाया। पिछले दो वर्षों में, महिला किसानों ने इस गतिविधि में अग्रणी भूमिका निभाई और अपनी गृहवाटिका में मिर्चा, धनिया, पालक, गाजर, बीन्स, मूली, टमाटर, खीरा, लौकी, चिचिण्डा एवं करैला की सब्ज़ियां उगायीं। हालांकि, लोगों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए, हमने अन्य दूसरी सब्ज़ियों के बीच सहजन एवं करी पत्ता की विषिष्ट पोषण विषेषताओं के कारण इन पौधों को भी उगाने पर जोर दिया ताकि रक्ताल्पता, मधुमेह, हाइपर टेन्षन आदि बीमारियों से बचाव हो सके।

इसके साथ ही किसानों को जैव निवेष तैयार करने पर पर भी प्रषिक्षित किया गया ताकि वे महंगे अजैविक निवेषों पर अपनी निर्भरता घटा सकें। तैयार जैव निवेषों में फार्मयार्ड मेन्योर, द्रवजीवाम्रुता, पूचीमरान्दु, पंचगव्य, मिर्चा-लहसुन घोल, नीबू कषाया, घनजीवामृत आदि शामिल थे। इन जैव निवेषों को जनधान्य फार्मर प्रोड्यूसर कम्पनी लिमिटेड से सीधे भी खरीदा गया। यह फार्मर प्रोड्यूसर कम्पनी लिमिटेड उन खेतिहर समुदायों के एक संघ के तौर पर स्थापित की गयी है, जिन्हें कृषि विविधकरण को संरक्षित करने, किसानों के उत्पादों के लिए बाजार से जुड़ाव स्थापित करने तथा जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए सामूहिक रूप से कार्य करने हेतु सषक्त बनाया गया है।

इच्छुक किसानों को बीज उत्पादन पर भी प्रषिक्षित किया गया, जिसे वे अपने अगले साल की खेती के लिए रखकर जनधान्य फार्मर प्रोड्यूसर कम्पनी लिमिटेड को बेच देते हैं। यह कार्य किसानों के लिए अतिरिक्त आमदनी के एक स्रोत के तौर पर है।

ग्रीन फाउण्डेषन ने रामनगर जिले के कनकपुरा तालुक के विभिन्न गाँवों में लगभग 160 खेतिहर परिवारों को गृहवाटिका उगाने हेतु सहायता प्रदान की है।

लाभ
जैविक रूप से उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करके अपने घरों के आस-पास उपलब्ध स्थानों में गृहवाटिका लगाने से अतिरिक्त लागत की भरपाई करने और परिवार की पोषण सम्बन्धी आवष्यकताओं को पूरा करने में मदद मिली है। मिर्चा, धनिया, पालक, गाजर, बीन्स, मूली, टमाटर, चौलाई, भिण्डी, खीरा, लौकी, चिचिण्डा एवं करैला आदि उनकी गृहवाटिका में उगायी जाने वाली कुछ सब्ज़ियां हैं।

हालांकि भूखण्ड के आकार के आधार पर प्रति परिवार उगायी जाने वाली सब्ज़ियों के उत्पादन में काफी भिन्नता होती है, लेकिन औसतन, एक परिवार प्रतिवर्ष 100 से 200 कुन्तल तक सब्ज़ियां उत्पादित कर लेता है। यद्यपि उत्पादित सब्ज़ियां प्रमुखतः परिवार के उपभोग के लिए होती हैं, परन्तु आवष्यकता से अधिक होने पर पड़ोसियों एवं रिष्तेदारों में बांट दिया जाता है और जो बचता है, उसे जनधान्य फार्मर प्रोड्यूसर कम्पनी लिमिटेड अथवा स्थानीय बाजार के माध्यम से बेच दिया जाता है। इस प्रकार गृहवाटिका न केवल पोषण का एक स्रोत है, वरन् त्वरित आमदनी के एक स्रोत के रूप में भी है। इसके अतिरिक्त, वे प्रतिमाह रू0 400 बचाने में भी सक्षम हैं, जिससे वे पहले सब्ज़ियां खरीदते थे।

पोषण पहलू के अलावा, गरीब परिवारों के लिए सब्जी की खेती त्वरित आमदनी के एक स्रोत के रूप में लोकप्रिय है। सब्ज़ियों की खेती अनाज और फलदार फसलों की अपेक्षा कम अवधि की होती है और इसमें कम लागत भी लगती है। इससे किसानों को कम बाहरी लागत स्थायी खेती से जुड़े रहने में सहायता मिलती है। किसान महंगे अजैविक निवेषों की अपेक्षा सस्ते जैव-निवेषों का उपयोग करते हैं। उनका पारम्परिक ज्ञान ऐसे उत्पादों को तैयार करने और उपयोग करने के दौरान काम आता है।

ऐसे और भी बहुत से लोग हैं, जो अपने घर के आस-पास खाली जमीन को बेहतर उपयोग में लाने और अपने परिवार की पोषण आवष्यकताओं को सुरक्षित करने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। लगभग 380 किसानांे ने गृहवाटिका को बढ़ावा देने वाली राज्य सरकार की योजना का लाभ लेने हेतु अपने ग्राम पंचायत में आवेदन पत्र दिया है। इस योजना के अन्तर्गत लाभार्थी को गृहवाटिका स्थापित करने हेतु बीज सहित रू0 2750.00 का पैकेज दिया जायेगा।

ग्रीन फाउण्डेषन


ग्रीन फाउण्डेषन
रु25, एसीईएस लेआउट, प्रथम मुख्य मार्ग, अष्वथ नगर
आरएमवी द्वितीय स्टेज, बंगलौर- 560 094
ई-मेल: contact@greenfoundation.in

Source: Small farmers and safe vegetable cultivation, LEISA India, Vol.22, No.3, September 2020

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