पारिस्थितिक कृषि पर एक पत्रिका

व्यावहारिक क्षेत्र के अनुभवों का खजाना

संसाधनों का पुनर्चक्रीकरण: स्थाई जीवन का एक रास्ता

संसाधनों का पुनर्चक्रीकरण: स्थाई जीवन का एक रास्ता

संसाधनों के पुनर्चक्रीकरण और पुनर्प्रयोग के माध्यम से स्थाई कृषि पारिस्थितिकी गतिविधियों को बढ़ावा देकर न केवल बाहरी स्रोतांे पर निर्भरता कम होती है, वरन् अपशिष्टों को भी कम किया...

कृषि पारिस्थितिकी: जलवायु अनुकूलित खाद्य प्रणाली की ओर

कृषि पारिस्थितिकी: जलवायु अनुकूलित खाद्य प्रणाली की ओर

कृषि पारिस्थितिकी अभ्यासांे को अपनाने से पारिस्थितिकी प्रणाली का संरक्षण करने के अलावा आय उपार्जन की भी संभावना बनती है। यहां तक कि यदि गांव में 50 प्रतिशत किसान भी स्थाई कृषि को...

मटका खाद ने दिखाया खुशहाली का रास्ता

बाढ़ प्रवण इलाका एवं मौसम की अनिश्चितता दोनों ही वहां रहने वाले किसानों के लिए चुनौती भरे होते हैं। बाढ़ प्रवण इलाके में लोग खरीफ की खेती करते ही नहीं अथवा करते हैं तो भगवान भरोसे।...

शून्य लागत खेती

श्री मालेशप्पा गुलप्पा बिसेरोट्टी कर्नाटक के धारवाड़ जिले में अवस्थित कुण्डगोल तालुक के हीरेगुंजल गांव के रहने वाले हैं। 1990 के बाद से यह क्षेत्र लगातार पानी की भयंकर कमी से जूझ...

छोटी खेती लाभप्रद हो सकती है

खेती के लिए छोटी जोत को लाभकारी न मानने वाले किसानों के लिए एकीकृत खेती मॉडल एक बेहतर विकल्प हो सकता है। इसे हरियाणा, सोनीपत के रमेश चन्दर डागर ने अपने खेत पर सिद्ध किया है।...

एकीकृत मछली खेती: एक त्रि-सामग्री दृष्टिकोण

एकीकृत मछली खेती: एक त्रि-सामग्री दृष्टिकोण

उत्तराखण्ड के पहाड़ी क्षेत्रों में, पानी की प्रचुर मात्रा होने के कारण समुदाय ने कृषि के पूरक के तौर पर एक वैकल्पिक आजीविका पायी है। मुर्गी पालन और सब्जी की खेती के साथ मछली पालन...

मिश्रित फसल प्रणाली का अधिकतम उपयोग करना

मिश्रित फसल प्रणाली का अधिकतम उपयोग करना

तमिलनाडु के पुडुक्कोटई जिले के कोविल वीराक्कुडी गांव के रहने वाले श्री कलाईसेलवन एक युवा व उत्साही किसान हैं। देश भर के अन्य स्थानों की तरह कोविल वीराक्कुडी में भी पिछले पांच...

मूल्य श्रृंखला में नवाचार से स्थाई आजीविका सुनिश्चित

मूल्य श्रृंखला में नवाचार से स्थाई आजीविका सुनिश्चित

उड़ीसा के कोरापुट जिले में किसानों को फार्मर प्रोड्यूसर कम्पनी के तौर पर संगठित करके औद्यानिक उत्पादों का प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और सामूहिक विपणन का कार्य किया जा रहा है। खेत...

स्थानीय बीजों तक पहुंच बनाने के माध्यम से खाद्य सम्प्रभुता को बनाये रखना

स्थानीय बीजों तक पहुंच बनाने के माध्यम से खाद्य सम्प्रभुता को बनाये रखना

महाराष्ट््र के आदिवासी क्षेत्रों के किसानों ने अपने भोजन की संप्रभुता बनाये रखने के लिए स्थानीय, पारम्परिक पुनर्जीवन एवं संरक्षण की सहभागी प्रक्रिया के माध्यम से स्थानीय बीजों के...