भूमि सुधा मृदा उर्वरता को बढ़ाने के लिए बायोमॉस का पुनर्चक्रीकरण

भूमि सुधा मृदा उर्वरता को बढ़ाने के लिए बायोमॉस का पुनर्चक्रीकरण

झारखण्ड में खूंटी और रांची जिलों के किसान अपने फलों के बगीचों में बायोमॉस पैदा करने वाले पौधों को शामिल कर लाभान्वित हो रहे हैं। पौधों की नालियों में बायोमॉस की मल्चिंग करने से मृदा नमी, मृदा पोषण एवं जीवाष्मों की मात्रा में उल्लेखनीय वृद्धि पायी गयी है, जो पौधों की...
सूक्ष्मजीव: संसाधन पुनर्चक्रण सहायक

सूक्ष्मजीव: संसाधन पुनर्चक्रण सहायक

व्यवहारिक रूप में खेती में जैविक विकल्प ही संसाधन पुनर्चक्रण और एकीकृत प्रबंधन को बढ़ावा देते हैं जिससे फसली पौधों पर जलवायु परिवर्तन के खतरों को, ऑर्गेनों-धातु प्रदूषकों तथा कृषि के अंधाधुंध उपयोग से होने वाले मृदा प्रदूषण से के नुकसान को कम करने में बहुत बड़ा योगदान...
संसाधन दक्षता हेतु पुनर्चक्रण:ः विस्तार का एक व्यवहारिक तरीका

संसाधन दक्षता हेतु पुनर्चक्रण:ः विस्तार का एक व्यवहारिक तरीका

जैविक कृषि अवशेषों का व्यवस्थित पुनर्चक्रण करते हुए मूल्य संवर्धन करके खेत को अधिक उत्पादक और आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। कई मायनों में देखा जाय तो, पुनर्चक्रीकृत संसाधन भी किसानों को पारिस्थितिक सेवा प्रदान करने में सक्षम बनाते हैं। खासकर छोटे और सीमांत किसानों के...
अपशिष्टों को मूल्यवान संसाधनों में बदलना: जैविक गृहवाटिका के अनुभव

अपशिष्टों को मूल्यवान संसाधनों में बदलना: जैविक गृहवाटिका के अनुभव

गृहवाटिका के माध्यम से खाद्य उत्पादन एवं आजीविका को उन्नत बनाने की तरफ नये सिरे से ध्यान दिया जा रहा है। गृह वाटिका को तैयार करते समय कृषि पारिस्थितिकी पर सीखों एवं अनुभवों के आदान-प्रदान ने फसल एवं खेत अपशिष्टों के प्रबन्धन एवं प्रभावी पुनर्चक्रण पर नये विचारों एवं...
संसाधनों का पुनर्चक्रीकरण: स्थाई जीवन का एक रास्ता

संसाधनों का पुनर्चक्रीकरण: स्थाई जीवन का एक रास्ता

संसाधनों के पुनर्चक्रीकरण और पुनर्प्रयोग के माध्यम से स्थाई कृषि पारिस्थितिकी गतिविधियों को बढ़ावा देकर न केवल बाहरी स्रोतांे पर निर्भरता कम होती है, वरन् अपशिष्टों को भी कम किया जाता है। विविधीकृत खेती करने से बेहतर पोषण और आय मिलती है परिणामस्वरूप बेहतर जीवन जीने के...
कृषि पारिस्थितिकी: जलवायु अनुकूलित खाद्य प्रणाली की ओर

कृषि पारिस्थितिकी: जलवायु अनुकूलित खाद्य प्रणाली की ओर

कृषि पारिस्थितिकी अभ्यासांे को अपनाने से पारिस्थितिकी प्रणाली का संरक्षण करने के अलावा आय उपार्जन की भी संभावना बनती है। यहां तक कि यदि गांव में 50 प्रतिशत किसान भी स्थाई कृषि को अपना लें तो यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी सफलता होगी। यह समय जलवायु अनुकूलित कृषि...